​सात​ बार उजड़ी, 8 बार बसी; जानिए भारत के उस शहर की कहानी जो आज भी है दिलचस्प

भारत का इतिहास सदियों पुराना है, इस दौरान कई साम्राज्य बने और मिट गए। देश के इस इतिहास में कई ऐसे शहर रहे हैं जिन्होंने वैभव के साथ-साथ विनाश का दौर देखा है। लेकिन क्या आप भारत के उस शहर के बारे में जानते हैं, जिसे एक या दो बार नहीं, बल्कि लगभग 7 से 8 बार उजाड़ा और फिर बसाया गया है। आइए आज उस खास शहर के बारे में जानते हैं, जिसका इतिहास की कई दास्तान कहता है।

Authored by: वर्षा कुशवाहाUpdated May 27 2026, 17:25 IST
भारत वह शहर, जिसे कई बार बसाया और उजाड़ा गयाImage Credit : Canva01 / 07

भारत वह शहर, जिसे कई बार बसाया और उजाड़ा गया

​भारत में 7000 से अधिक शहर हैं, लेकिन आज हम उस शहर की बात कर रहे हैं, जिसे हजारों साल के इतिहास में 7 से 8 बार उजाड़ा और फिर बसाया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि वह शहर और कोई नहीं बल्कि देश की राजधानी 'हमारी दिल्ली' है। आइए नजर डालते हैं दिल्ली के इतिहास के बारे में -​

'ढिल्लिका' की शुरुआतImage Credit : Canva02 / 07

'ढिल्लिका' की शुरुआत

​सदियों बाद, 11वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा अनंगपाल ने इस क्षेत्र को फिर बसाया और इसे 'ढिल्लिका' कहा गया। उन्होंने यहां प्रसिद्ध लाल कोट किले का निर्माण कराया। इसके बाद पृथ्वीराज चौहान ने इस शहर का विस्तार किया और इसे 'किला राय पिथौरा' के नाम से जाना गया।​

दिल्ली के इतिहास में आया सुल्तानों का दौरImage Credit : Canva03 / 07

दिल्ली के इतिहास में आया सुल्तानों का दौर

​कुतुबुद्दीन ऐबक और गुलाम वंश के आगमन के साथ दिल्ली सल्तनत की शुरुआत हुई। इसके बाद आने वाले हर नए शासक ने अपनी सुरक्षा और शौक के लिए दिल्ली को एक नई जगह पर उजाड़कर बसाया।अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोल आक्रमणों से बचने के लिए 'सीरी' को अपनी राजधानी बनाया। उसके बाद गयासुद्दीन तुगलक ने पत्थरों का एक विशाल और मजबूत शहर 'तुगलकाबाद' बसाया, जो बाद में पानी की कमी और सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के श्राप की कहानियों के कारण उजड़ गया। इसके बाद मोहम्मद बिन तुगलक और फिरोज शाह तुगलक ने भी दिल्ली के दायरे में अपनी नई-नई राजधानियां बसाई थी।​

आक्रमणकारियों ने उजाड़ी दिल्लीImage Credit : Canva04 / 07

आक्रमणकारियों ने उजाड़ी दिल्ली

​दिल्ली की धन-दौलत ने हमेशा आक्रमणकारियों को आकर्षित किया है। साल 1398 में तैमूर लंग ने दिल्ली पर हमला किया और पूरे शहर को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। साल 1739 में ईरान के शासक नादिर शाह ने दिल्ली पर हमला किया और यहां कत्लेआम मचाया। हर हमले के बाद लगा कि दिल्ली अब कभी नहीं संभलेगी, लेकिन यह फिर एक बार खड़ी हुई।​

मुगलों का वैभव और 'शाहजहांनाबाद'Image Credit : Canva05 / 07

मुगलों का वैभव और 'शाहजहांनाबाद'

​मुगल बादशाह शाहजहां ने दिल्ली को एक बार फिर से उसका पुराना वैभव लौटाया। उन्होंने यमुना नदी के किनारे एक बेहद खूबसूरत शहर बसाया, जिसे 'शाहजहांनाबाद' कहा गया। आज हम जिस 'पुरानी दिल्ली' को देखते हैं, जिसमें लाल किला, जामा मस्जिद और चांदनी चौक शामिल हैं, वह इसी दौर की देन है। इस दौरान दिल्ली कला, संस्कृति और व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र बन गई।​

अंग्रेजों का दौर और 'नई दिल्ली' का जन्म​Image Credit : Canva06 / 07

अंग्रेजों का दौर और 'नई दिल्ली' का जन्म​

​साल 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने दिल्ली पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया। इस क्रांति के दौरान शहर को भारी नुकसान पहुंचाया गया। बाद में, साल 1911 में अंग्रेजों ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने का फैसला किया। ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस और हरबर्ट बेकर ने मिलकर एक आधुनिक शहर का खाका खींचा, जिसे आज हम 'नई दिल्ली' या लुटियंस दिल्ली के नाम से जानते हैं।​

क्यों कहा जाता है दिल्ली को 'दिलवालों की नगरी'?Image Credit : Canva07 / 07

क्यों कहा जाता है दिल्ली को 'दिलवालों की नगरी'?

​इतनी बार तबाह होने और फिर से उठ खड़े होने के ही कारण इतिहासकारों ने दिल्ली को एक 'अमर शहर' माना है। दिल्ली की खासियत रही है कि इसे चाहे जितनी बार भी गिराया दिया जाए, इसकी मिट्टी ने कभी हार नहीं मानी। आज दिल्ली न सिर्फ भारत की राजनीतिक राजधानी है, बल्कि देश की धड़कन भी है, जो अपने भीतर हजारों साल के उजड़ने और बसने की दास्तान समेटे हुए है।​

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