ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) वैश्विक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दुनिया की तेल और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए यह जलमार्ग सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है, जो इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा बनाता है। यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं या प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो करेंट अफेयर्स और सामान्य ज्ञान की दृष्टि से इसके भौगोलिक और रणनीतिक महत्व को समझना जरूरी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सीमा किन देशों से मिलती है और यह विश्व के लिए इतना खास क्यों है।
विश्व के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह फारस की खाड़ी और अरब सागर के खुले समुद्र से जुड़ने का एकमात्र मार्ग है। इसी स्थान से प्राकृतिक गैस, तेल व अन्य कई चीजों का परिवहन होता होता। यह विश्व के लिए ऊर्जा के एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
बता दें कि ईरान से निकटता के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का केंद्र बन जाता है, ठीक वैसे ही जैसे अभी बना हुआ है। इसके स्थान पर यातायात में बाधा होने पर विश्व के अधिकांश देशों में तेल की कीमतों पर असर देखने को मिलता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दो देशों के साथ सीमा साझा करता है। एक है ईरान (उत्तरी तट) और दूसरा है ओमान (दक्षिणी तट)।
ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप और ईरान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा जल मार्ग है। इसकी चौड़ाई 21 से 33 किलोमीटर के बीच है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए पूरा करता है। इसी मार्ग से भारत में तेल टैंकर आते हैं।
स्टेट ऑफ होर्मुज की भारत के पश्चिमी तट, गुजरात के कांडला बंदरगाह तक की दूरी करीब 1000 से 1550 किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने में जहाजों को करीब 37 घंटे से लेकर 53 घंटे तक का समय लग सकता है। यह समय जहाज की गति और समुद्री परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
जानकारी के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों को भारत आने में 2 से 3 दिन का समय लगता है। यह अनुमान तेल टैंकर जहाज की 24 से 32 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड के अनुसार है।