पुलिस विभाग में निचले स्तर के कांस्टेबल से लेकर सबसे बड़ी पोस्ट डीजीपी तक कई पद होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंस्पेक्टर और एसएचओ में क्या अंतर होता है।
पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर और एसएचओ में कौन ज्यादा पावरफुल होता है और किसे ज्यादा सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं। अगर आप भी नहीं जानते हैं कि दोनों में क्या अंतर होता है और कौन ज्यादा पावरफुल होता है तो यहां जान लीजिए।
बता दें इंस्पेक्टर पुलिस विभाग का एक रैंक होता है। यह सब इंस्पेक्टर यानी एसआई से बड़ा और डीएससी या एसपी से छोटा होता है। एक इंस्पेक्टर किसी भी थाने में तैनात हो सकते हैं या किसी विशेष ब्रांच जैसे क्राइम ब्रांच, ट्रैफिक पुलिस, स्पेशल टास्ट फोर्स (STF) में भी काम कर सकते हैं।
इसके अलावा SHO का फुलफॉर्म स्टेशन हाउस ऑफिसर (Station House Officer) होता है। ध्यान रहे पुलिस विभाग में यह कोई रैंक नहीं बल्कि जिम्मेदारी होती है। वह किसी भी पुलिस थाने का इंचार्ज होता है।
एसएचओ थाने में होने वाली सभी घटनाओं, गतिविधियों, मामलों, शिकायतों और पुलिस कार्यों की देखभाल करता है। थाने में किसी भी चीज के लिए एसएचओ की परमिशन लेनी होती है।
यदि किसी इंस्पेक्टर को थाने की जिम्मेदारी दी जाती है तो वह एसएचओ कहलाता है। एसएचओ का कार्य अधिक जिम्मेदारी प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़ा होता है। जबकि एक इंस्पेक्टर की भूमिका सामान्य पुलिस कार्यों और जांच तक सीमित हो सकती है।
इंस्पेक्टर और एसएचओ में स्टेशन हाउस ऑफिसर यानी एसएचओ ज्यादा पावरफुल माना जाता है। एक थाना प्रभारी के रूप में एसएचओ पूरे पुलिस स्टेशन का कार्यभार संभालता है। वहीं सैलरी की बात करें तो यदि दोनों की सैलरी लगभग एक समान हो सकती है।