EL Nino एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के तापमान में बदलाव के कारण उत्पन्न होती है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है, खासकर भारत जैसे देशों पर, जहां मानसून कृषि और जीवन का आधार है। (image - chatgpt)
सामान्य स्थिति में प्रशांत महासागर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच तापमान संतुलित रहता है। लेकिन जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो इस स्थिति को EL Nino कहा जाता है। यह घटना हर 2 से 7 साल में एक बार देखने को मिलती है और कई महीनों तक बनी रह सकती है।
EL Nino के दौरान भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है। इससे बारिश सामान्य से कम होती है, जिससे सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।
एल नीनो के समय भारत में तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे हीटवेव (लू) की स्थिति बन सकती है।
भारत में कृषि काफी हद तक बारिश पर निर्भर है। कम बारिश होने से फसलों की पैदावार घट सकती है, खासकर धान और दालों जैसी फसलों पर असर पड़ता है।
अधिकतर मामलों में एल नीनो का असर नकारात्मक होता है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में यह सामान्य या थोड़ी अधिक बारिश भी ला सकता है। हालांकि, भारत में इसका प्रभाव आमतौर पर कमजोर मानसून के रूप में देखा जाता है।
कम बारिश के कारण जलाशयों और नदियों का जलस्तर घट सकता है, जिससे पीने के पानी की कमी भी हो सकती है।