शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में भारत का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। आज भले ही हम मॉर्डन एजुकेशन इंस्टीट्यूजट की बात करते हों, लेकिन एक दौर ऐसा भी था, जब भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय वैश्विक शिक्षा के केंद्र हुआ करते थे। इन विश्वविद्यालयों की शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर इतना ऊंचा था कि छात्र सात समुद्र पार कर ज्ञान की खोज में भारत खिंचे चले आते थे।
इन प्राचीन केंद्रों में न केवल धार्मिक ज्ञान, बल्कि तर्कशास्त्र (Logic), खगोल विज्ञान (Astronomy), सैन्य विज्ञान, चिकित्सा और राजनीति शास्त्र जैसे जटिल विषयों की शिक्षा भी दी जाती थी। आइए, भारत के उन 5 सबसे प्राचीन और गौरवशाली विश्वविद्यालयों पर नज़र डालें, जिन्होंने विश्व को ज्ञान का नया मार्ग दिखाया।
दुनिया की सबसे प्राचीन यूनिवर्सिटी के तौर पर प्रसिद्ध तक्षशिला यूनिवर्सिटी वर्तमान समय में पाकिस्तान के पंजाब प्रांच में स्थित है। इसकी स्थापना 600 ईसा पूर्व के आसपास की गई थी। इसमें चिकित्सा, गणित, सैन्य विज्ञान, समाजिक विज्ञान जैसे विभिन्न विषयों की शिक्षा प्रदान की जाती थी।
भारत के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन यूनिवर्सिटी में नालंदा का नाम तो आना ही है। यह प्राचीन काल में बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। नालंदा में पढ़ने के लिए दुनिया के विभिन्न देशों से छात्र आते थे और यहां विभिन्न विषयों की शिक्षा प्रदान की जाती थी।
बिहार में स्थित ओदंतपुरी यूनिवर्सिटी देश के सबसे प्राचीन विश्वविद्यालयों में शामिल है। इसकी स्थापना राजा धर्मपाल द्वारा कराई गई थी। बता दें कि आज यह नालंदा के बाद देश का दूसरा सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है।
गुजरात के भावनगर में सथित वल्लभी यूनिवर्सिटी देश की सबसे प्राचीन यूनिवर्सिटी में से एक है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त साम्राज्य द्वारा की गई थी। हालांकि इसपर शासन मैत्रक राजवंशों का चला था। यहां बौद्ध विचारों के साथ चिकित्सा और कानून आदि विषयों की शिक्षा प्रदान की जाती थी।
बिहार के भागलपुर में स्थित विक्रमशिला यूनिवर्सिटी की स्थापना 9वीं शताब्दी में हुई थी। इस विश्वविद्यालय की स्थापना भी राजा धर्मपाल ने करवाई थी। इस यूनिवर्सिटी ने शिक्ष, संस्कृति और दर्शन के विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त की थी।