रेहड़ी-पटरी वाले की बेटी बनी IAS, पहले प्रयास में हुई थीं फेल, फिर 93वीं रैंक लाकर बनाया कीर्तिमान

छोटी जगह, बड़े सपने, संघर्ष भरी जिंदगी, सुरक्षा के साथ भविष्य के सपने, यही कहानी थी दीपेश कुमारी की जिन्होंने आईएएस अधिकारी बनकर इन सपनों को साकार किया। उनकी कहानी एक मध्यमवर्गीय शहरी व्यक्ति के औसत जीवन से कोसों दूर थी। राजस्थान के भरतपुर के एक छोटे से इलाके से आने वाली दीपेश पांच भाई-बहनों में से एक थीं। उनके पिता ने 25 साल तक ठेले पर तले हुए स्नैक्स बेचकर सात लोगों के परिवार का भरण-पोषण किया। इसी छोटे से काम से कमाई करके, कुमारी के पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया। अपनी बेटी दीपेश कुमारी के आईएएस अधिकारी बनने के बाद भी उन्होंने काम करना नहीं छोड़ा और जारी रखा।

Authored by: नीलाक्ष सिंहUpdated Aug 12 2025, 16:23 IST
रेहड़ी-पटरी वाले की बेटी बनी IAS, पहले प्रयास में हुई थीं फेलImage Credit : Canva01 / 07

रेहड़ी-पटरी वाले की बेटी बनी IAS, पहले प्रयास में हुई थीं फेल

आज की सक्सेस स्टोरी बड़ी खास है, आज हम बात करेंगे राजस्थान के एक छोटे से गांव से आने वाली दीपेश कुमारी की, जिनका जीवन किसी मध्यमवर्गीय शहरी व्यक्ति के औसत जीवन से कोसों दूर था, लेकिन कहते हैं जो रास्ते के कांटो को मोटिवेशन बना लें, उनके लिए वे कांटे किसी फूल की तरह हो जाते हैं। दीपश कुमारी भी एक मेहनती छात्र रहीं हैं, उन्होंने बेसिक संसाधनों के अभाव में अपना लक्ष्य (आईएएस) हासिल कर दिखाया। (image - tnn)

बेटी से ज्यादा पिता की जीत Image Credit : Canva02 / 07

बेटी से ज्यादा पिता की जीत

IAS Deepesh Kumari के पिता गोविंद कुमार है, जो​ कि उस समय सड़क पर ठेला लगाकर पकौड़ी बेचते थे, जब उनकी लाडली बिटिया अपने सपने की ओर दौड़ रही थी। IAS Deepesh Kumari के पिता ने कभी भी अपने पांचों बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी, हर मौसम में मेहनत की, पैसे कमाए। सही मायने में इस तरह की जीत या सफलता उम्मीदवार से ज्यादा उसके ​माता पिता या परिवार की होती है। (image - canva)

​ठेला लगाकर पाला सात लोगों को​Image Credit : Canva03 / 07

​ठेला लगाकर पाला सात लोगों को​

IAS Deepesh Kumari के पिता ने केवल ठेला लगाकर कैसे 7 सदस्यों के परिवार को पाला होगा, ये कल्पना करना भी मुश्किल है, क्योंकि आज के समय में हरेक आदमी को कमाने की जरूरत लगती है, तब भी आर्थिक परेशानियां बनी रहती है। (image - canva)

घर छोटा लेकिन दिल बड़ा​Image Credit : Canva04 / 07

घर छोटा लेकिन दिल बड़ा​

​पिता गोविंद कुमार घर में इकलौते हैं कमाने वाले रहे, लेकिन वे पढ़ाई-लिखाई का महत्व हमेशा समझते थे, इसलिए उन्होंने घर छोटा रखा, लेकिन दिल बड़ा। उन्होंने पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी और इनकी सोच की वजह से आज दीपेश एक IAS अफसर हैं। (image - canva)​

भाई बहन के लिए प्रेरणा​Image Credit : Canva05 / 07

भाई बहन के लिए प्रेरणा​

​दीपेश कुमारी की एक बहन डॉक्टर बन चुकी है और दूसरी बहन और एक भाई एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। अपने पिता को कड़ी मेहनत करते और कई संघर्षों के बाद भी अपने बच्चों को सब कुछ प्रदान करते देखना ही दीपेश कुमारी और उनके भाई-बहनों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। (image - canva)​

आईएएस दीपेश कुमारी कौन हैं?​Image Credit : Canva06 / 07

आईएएस दीपेश कुमारी कौन हैं?​

​दीपेश कुमारी ने भरतपुर के शिशु आदर्श विद्यामंदिर में पढ़ाई की। उन्होंने 10वीं की परीक्षा में 98% और 12वीं की परीक्षा में 89% अंक प्राप्त किए। उन्होंने जोधपुर के राजकीय एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से एमटेक की पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद उन्होंने एक साल तक एक निजी कंपनी में नौकरी की और इस्तीफा देने के बाद यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। (image - canva)​

दिल्ली से की यूपीएससी की तैयारीImage Credit : Canva07 / 07

दिल्ली से की यूपीएससी की तैयारी

दीपेश ने यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली से कोचिंग ली, लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन के कारण वह घर वापस आ गईं और फिर से पूरी लगन से तैयारी शुरू कर दी। वह पहले प्रयास में इंटरव्यू राउंड में असफल रहीं, लेकिन 2021 में अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 93वीं रैंक हासिल की। उनका वैकल्पिक विषय गणित था। उनकी सफलता उनके भाई-बहनों के लिए प्रेरणा बन गई। वह अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार के निरंतर सहयोग को देती हैं। उनकी मां का साहस उनकी प्रेरणा शक्ति बना, जिसने इस विचार को पुष्ट किया कि असफलता में भी कड़ी मेहनत खुशी का स्रोत होती है। (image - canva)

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!