कभी सड़कों पर भीख मांगने वाली लड़की आज बनी डॉक्टर, गरीबी की बेड़ियां तोड़कर ऐसे छुआ आसमान

Pinkii Haryaan Success Story: कहते हैं अगर सपने बुलंद हों और दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो आपको कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ने से कोई भी नहीं रोक सकता। ये कहानी है एक ऐसी लड़की की, जो कभी किसी तरह भीख मांगकर गुजर बसर करती थी। परिवार अत्यधिक गरीबी से जूझ रहा था और खाने के लिए संघर्ष कर रहा था। मगर फिर इस लड़की ने परिवार की गरीबी की बेड़ियां तोड़कर कुछ ऐसा कर दिखाया, जिसकी किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी।

Authored by: कुसुम भट्टUpdated Nov 5 2025, 11:22 IST
धर्मशाला की गलियों से चीन का सफरImage Credit : IStock01 / 05

धर्मशाला की गलियों से चीन का सफर

कभी सड़कों पर भीख मांगने वाली इस लड़की पिंकी ने अपना डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया। धर्मशाला की गलियों से चीन तक का सफर और फिर डॉक्टर बनकर ही वे भारत लौटीं। पिंकी के मन में पढ़ाई के प्रति जुनून ने ही उन्हें सफलता के इस मुकाम पर पहुंचाया। आइये जानते हैं पिंकी की इस कहानी के बारे में...

कभी भीख मांगती थी ये लड़कीImage Credit : IStock02 / 05

कभी भीख मांगती थी ये लड़की

पिंकी हरयान... जो हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज की सड़कों पर भीख मांगा करती थी। इस छोटी सी बच्ची का परिवार अत्यंत गरीबी से जूझ रहा था। सबके दिन बेहद संघर्ष में गुजर रहे थे। मगर फिर इस बच्ची की जिंदगी में देवदूत बनकर आए तिब्बती भिक्षु और टोंग-लेन चैरिटेबल ट्रस्ट के निदेशक लोबसांग जामयांग। जिनसे अचानक हुई मुलाकात ने इस बच्ची की जिंदगी को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।

एक मुलाकात ने बदल दी जिंदगीImage Credit : IStock03 / 05

एक मुलाकात ने बदल दी जिंदगी

जामयांग ने पिंकी को भीख मांगते हुए देखा और पूछताछ कर उसकी झुग्गी में पहुंचे। वे पिंकी को हॉस्टल भेजकर पढ़ाई करवाना चाहते थे मगर पिंकी के पिता उसे भेजने के लिए बिल्कुल भी राजी नहीं थे। शुरुआत में बहुत मना करने के बाद आखिरकार पिंकी को आगे की पढ़ाई करने की अनुमति मिल गई और फिर पीटीआई रिपोर्ट के मुताबिक यहीं से उसकी शिक्षा का सफर शुरू हुआ।

आर्थिक तंगी से नहीं मिला एडमिशनImage Credit : IStock04 / 05

आर्थिक तंगी से नहीं मिला एडमिशन

जामयांग के साथ 19 सालों से जुड़े हुए थे उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव। अजय बताते हैं कि पिंकी शुरु से ही पढ़ाई करना चाहती थी। उसकी मेहनत रंग लाई और उसने सीनियर सेकेंडरी परीक्षा और नीट क्लीयर कर लिया। लेकिन नीट क्लीयर करने के बाद भी पिंकी के लिए चुनौतियां कम नहीं थीं। आर्थिक तंगी की वजह से वो देश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं ले सकी।

एफएमजीई की तैयारी कर रहीं पिंकीImage Credit : IStock05 / 05

एफएमजीई की तैयारी कर रहीं पिंकी

मगर कहते हैं कि जहां सपने बुलंद हों वहां तकदीर भी साथ दे देती है। पिंकी के पढ़ाई के प्रति जुनून को देखते हुए टोंग-लेन चैरिटेबल ट्रस्ट ने अपनी यूके ब्रांच से पैसा इकट्ठा किया, जिससे उसनी आगे की पढ़ाई चीन से की। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे धर्मशाला लौट चुकी हैं। अब वे भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) की तैयारी कर रही हैं।

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