"बुढ़ापे में दिमाग खराब हो गया है", तानों के बीच 3 बच्चों की मां ने रचा इतिहास, UPPSC पास कर बनी PCS अधिकारी​

अक्सर आपने देखा होगा कि लोग जिम्मेदारियों और बढ़ती उम्र का हवाला देकर अपने सपनों को पीछे छोड़ देते हैं, लेकिन कुछ लोग आज भी ऐसे ऐसे हैं, जो हर चुनौती को मात देकर इतिहास रच देते हैं। ऐसी ही एक कहानी आज हम आपको बताने वाले हैं। यह कहानी उत्तर प्रदेश की दीपा भाटी की, जिन्होंने समाज के तानों और घरेलू कार्यों के बीच अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। शादी के 18 साल बाद और तीन बच्चों की मां होने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और PCS अधिकारी बनकर एक मिसाल कायम की। आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

Authored by: वर्षा कुशवाहाUpdated Jun 1 2026, 14:58 IST
बड़े सपनों के साथ शुरुआतImage Credit : Facebook01 / 07

बड़े सपनों के साथ शुरुआत

​दीपा भाटी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के एक छोटे से गांव 'कोंडली बांगर' की रहने वाली हैं। एक बेहद साधारण परिवार में जन्मी दीपा के पास भले ही संसाधनों की कमी थी, लेकिन उनकी आंखों में कुछ बड़ा कर दिखाने का सपन हमेशा रहा है। उनकी शुरुआती शिक्षा की बात करें तो वह केंद्रीय विद्यालय से हुई। पढ़ाई में हमेशा आगे रहने वाली दीपा ने केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन और उसके बाद हिस्ट्री विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।​

कम उम्र में शादी से बढ़ी जिम्मेदारियां​Image Credit : Facebook02 / 07

कम उम्र में शादी से बढ़ी जिम्मेदारियां​

​बचपन से ही कुछ अलग करने की चाह रखने वाली दीपा की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब कम उम्र में उनकी शादी हो गई। अक्सर शादी के बाद एक महिला के सपने धरे-धरे के रह जाते हैं। यहां भी शुरुआती समय में कुछ ऐसा ही हुआ। शादी के बाद ससुराल, पति और फिर तीन बच्चों की परवरिश उनके जीवन की मुख्य प्राथमिकता बन गई। घरेलू कामकाज के इस अंतहीन सिलसिले के बीच धीरे-धीरे पढ़ाई छूटती चली गई और एक समय ऐसा आया जब लगने लगा कि उनका सपना अब सिर्फ सपना ही बनकर रह जाएगा।​

भाई की सलाह पर सिविल सेवा की तरफ बढ़ा कदमImage Credit : Facebook03 / 07

भाई की सलाह पर सिविल सेवा की तरफ बढ़ा कदम

​अपने पैरों पर खड़े होने और खुद को व्यस्त रखने के लिए दीपा ने एक स्कूल में टीचिंग करना शुरू किया, लेकिन कुछ निजी कारणों से उन्हें वह नौकरी भी छोड़नी पड़ी। इस मुश्किल दौर में उनके भाई ने उन्हें एक नई राह दिखाई और यूपीपीएससी (UPPSC) परीक्षा की तैयारी करने की सलाह दी। भाई की यह बात दीपा के दिल में ऐसे उतरी की उन्होंने ठान लिया कि वह प्रशासनिक सेवा के लिए जमकर महनेत करेंगी और इसे पास करके दिखाएंगी।​

"बुढ़ापे में दिमाग खराब हो गया है" - सुनने पढ़े लोगों के ताने​Image Credit : Facebook04 / 07

"बुढ़ापे में दिमाग खराब हो गया है" - सुनने पढ़े लोगों के ताने​

​एक तरफ तीन बच्चों की देखरेख और दूसरी तरफ सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी - यह कोई आसान सफर नहीं था। क्योंकि दीपा ने इस परीक्षा की तैयारी करीब 40 वर्ष की उम्र में शुरू की। इसे देखते हुए आसपास के लोगों और रिश्तेदारों ने उनका हौसला बढ़ाने के बजाय उन पर तंज कसे। लोग कहते थे, "इस उम्र में इसे पढ़ाई सूझी है, जब बच्चों के पढ़ने की उम्र है तब यह खुद तैयारी कर रही है। जो बच्चे दिन-रात पढ़ते हैं, उनसे तो एग्जाम निकलता नहीं, यह क्या कर पाएगी।"​

दिन में घरेलू कामकाज और रातों को जागकर पढ़ाईImage Credit : Facebook05 / 07

दिन में घरेलू कामकाज और रातों को जागकर पढ़ाई

​लोगों के इस प्रकार के कड़वे बोल दीपा को चुभते तो थे, लेकिन उन्होंने इस नेगटिवीटी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने तानों को अपनी ताकत बनाया और दिन के समय हाउसवाइफ की तरह घर का चौका-बर्तन और बच्चों की जिम्मेदारी संभाली। लेकिन रात होते ही, जब पूरी दुनिया सो जाती थी, तब वह किताबें लेकर बैठती थी। नींद और आराम त्याग कर उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी।​

जब बेटी दे रही थी 12वीं की परीक्षा, तब मां बनीं क्लास-वन अफसर​Image Credit : Facebook06 / 07

जब बेटी दे रही थी 12वीं की परीक्षा, तब मां बनीं क्लास-वन अफसर​

​शुरुआती प्रयासों में नाकामी मिलने के बाद भी दीपा ने हार नहीं मानी। आखिरकार, वर्षों की उनकी तपस्या रंग लाई और UPPSC 2021 की परीक्षा में उन्होंने 166वीं रैंक हासिल की। यह पल न केवल दीपा के लिए ब्लकि पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व वाला था। दीपा ने इस कठिन परीक्षा को पास कर अधिकारी बनने का गौरव जो हासिल किया था। जिस समय दीपा क्लास-वन अफसर बनी छीक उसी समय उनकी बड़ी बेटी खुद 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही थी।​

एनसीईआरटी और निरंतरता को बताया सफलता का मूलमंत्रImage Credit : Facebook07 / 07

एनसीईआरटी और निरंतरता को बताया सफलता का मूलमंत्र

​अपनी तैयारी के बारे में पूछे जाने पर दीपा ने बताया कि उन्होंने कभी भी किसी शॉर्टकट का सहारा नहीं लिया। उन्होंने परीक्षा की तैयारी करने के लिए कक्षा 6 से 12वीं तक एनसीईआरटी किताबों को पढ़ा और सबसे पहले अपना बेस मजबूत किया। उसके बाद ही स्टैंडर्ड किताबों का अध्ययन किया। आज दीपा भाटी की यह अटूट लगन देश की उन लाखों महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है, जो जिम्मेदारियों के बोझ के तले अपने सपनों को पीछे छोड़ चुकी हैं।​

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