भारत-पाकिस्तान की सीमा पर बसे सरहदी बाड़मेर के एक छोटे से गांव में रहने वाले दलित परिवार में जन्म हुआ था रचना लीलड़ का। उनकी मां बताती है कि जब रचना का जन्म हुआ था तब आसपास रहने वाले लोगों ने उन्हें कहा कि उनके घर में 'पत्थर' पैदा हुआ है।
एनबीटी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बेटी के जन्म पर पत्थर पैदा हुआ है पत्थर पैदा हुआ है, सुन-सुनकर परेशान रचना की मां ने ठान लिया कि वह अपनी बेटी को पढ़ा-लिखा कर मील का पत्थर बनाएगी। और लोगों को बताएंगी उनके घर पत्थर नहीं मिसाल कायम करने वाली बेटी पैदा हुई है। बस रचना ने अपने मां की बात पत्थर की लकीर बन गई और उन्होंने उसके इस सपने को पूरा कर दिखाया।
दृढ संकल्प और मजबूत इरादों वाली रचना ने आठवीं तक की शिक्षा अपने गांव आटी से ही प्राप्त की। लेकिन उसके बाद की शिक्षा के लिए उन्हें बाड़मेर जिला मुख्यालय के पास स्थित स्कूल में दाखिला लिया और रोजाना 20 किलोमीटर का सफर अकेले तय करना शुरू किया।
कक्षा 12वीं की शिक्षा प्राप्त करने के बाद रचना ने इंजीनियरिंग में करियर बनाने का रास्ता चुना और इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लिया। इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में होने वाले कैंपस इंटरव्यू में सेलेक्ट होकर लाखों का पैकेज प्राप्त किया।
सरहदी बाड़मेर में रहने वाले दलित परिवार में पैदा हुई रचना केवल बाड़मेर में चर्चा का केंद्र नहीं बल्कि उनकी चर्चा गुजरात के पोरबंदर तक है। हो भी क्यों न, जन्म पर पत्थर कहलाने वाली एक दलित बेटी ने वो हासिल किया जो अच्छे-अच्छे लोग हासिल नहीं कर पाते।
इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने के बाद कैंपस इंटरव्यू में सफल हुई रचना बाड़मेर की पहली पेट्रो केमिकल इंजीनियर बनी। उन्होंने साल 2022 में गुजरात के पोरबंदर में करीब 28 लाख के पैकेज पर नौकरी प्राप्त की।
दलित परिवार में पैदा हुई रचना, जिसे जन्म पर ही लोगों ने पत्थर कहा था आज वह लाखों लड़कियों के लिए मिसाल बन गई है। उन्होंने साबित किया है कि बुलंद हौसले, दृढ़ संकल्प और कुछ कर दिखाने की चाह आपको कामयाबी दिला ही देती है।