देश की पहली महिला इंजीनियर, 15 साल में हुई थी शादी, जानें कहां से की थी पढ़ाई

जब भारत में लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते आज की तुलना में काफी मुश्किल थे, उस दौर में एक महिला ने इंजीनियरिंग जैसे पुरुष-प्रधान क्षेत्र में कदम रखा। उनका नाम था अय्यालासोमायजुला ललिता। 'नेशनल इंजीनियर्स डे' के अवसर पर जानें उनके बारे में

Authored by: Neelaksh SinghUpdated Sep 15 2026, 13:52 IST
मिलिए देश की पहली महिला इंजीनियर सेImage Credit : Canva01 / 07

मिलिए देश की पहली महिला इंजीनियर से

जब भारत में लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते आज की तुलना में काफी मुश्किल थे, उस दौर में एक महिला ने इंजीनियरिंग जैसे पुरुष-प्रधान क्षेत्र में कदम रखा, उनका नाम था अय्यालासोमायजुला ललिता। आइए National Engineers Day के अवसर पर जानते हैं Ayyalasomayajula Lalitha के बारे में, उन्होंने कहां से की इंजीनियरिंग (Image- ChatGPT)

​इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में हासिल की डिग्री​Image Credit : Canva02 / 07

​इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में हासिल की डिग्री​

Ayyalasomayajula Lalitha को भारत की पहली महिला इंजीनियर के रूप में जाना जाता है। उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल कर न सिर्फ अपना करियर बनाया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं के लिए भी रास्ता तैयार किया।

अय्यालासोमायजुला ललिता कौन थीं?Image Credit : Canva03 / 07

अय्यालासोमायजुला ललिता कौन थीं?

Ayyalasomayajula Lalitha का जन्म 27 अगस्त 1919 को मद्रास, जो अब चेन्नई है, में एक तेलुगु परिवार में हुआ था। उनके पिता पप्पू सुब्बा राव इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। परिवार में शिक्षा का माहौल होने के बावजूद उस समय लड़कियों के लिए इंजीनियरिंग पढ़ना आम बात नहीं थी।

भारत की पहली महिला इंजीनियरImage Credit : Canva04 / 07

भारत की पहली महिला इंजीनियर

ललिता ने परिस्थितियों को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया। उन्होंने 1943 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और भारत की पहली महिला इंजीनियर के रूप में अपनी पहचान बनाई।

ललिता ने कहां से की इंजीनियरिंग?Image Credit : Canva05 / 07

ललिता ने कहां से की इंजीनियरिंग?

उन्होंने College of Engineering, Guindy से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। यह वही संस्थान है जिसे आज Anna University के Guindy campus से जोड़ा जाता है। उस समय कॉलेज में लड़कियों की संख्या बेहद कम थी और ललिता को एक ऐसे माहौल में पढ़ाई करनी पड़ी, जहां इंजीनियरिंग को मुख्य रूप से पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था।

15 साल में शादी, 18 में बनी मां और फिर विधवाImage Credit : Canva06 / 07

15 साल में शादी, 18 में बनी मां और फिर विधवा

ललिता का जीवन सिर्फ पढ़ाई की चुनौती तक सीमित नहीं था। उनकी शादी महज 15 साल की उम्र में हो गई थी। 1937 में उन्होंने बेटी को जन्म दिया। इसके कुछ ही महीनों बाद उनके पति का निधन हो गया और कम उम्र में ही वह विधवा हो गईं। इसके बाद भी उन्होंने अपनी जिंदगी को वहीं रोकने से इनकार कर दिया। परिवार, खासकर उनके पिता ने उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद की। उन्होंने आगे शिक्षा हासिल की और इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की।

उनकी कहानी हमेशा रहेगी खासImage Credit : Canva07 / 07

उनकी कहानी हमेशा रहेगी खास

ललिता की कहानी सिर्फ भारत की पहली महिला इंजीनियर बनने की कहानी नहीं है। यह उस सोच को चुनौती देने की कहानी है, जो मानती थी कि कुछ क्षेत्र महिलाओं के लिए नहीं हैं। कम उम्र में शादी, मातृत्व और पति को खोने जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना रास्ता बनाया।

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