आपने इस बात पर ध्यान तो दिया ही होगा कि ट्रेन के गेट के पास वाली खिड़की पर ज्यादा रॉड लगी होती है। जबकि अन्य खिड़कियों पर ऐसा नहीं होता। तो इसके पीछे की वजह क्या हो सकती है?
दरअसल, ट्रेन में पहले चोरी आम बात थी। आज के समय में भी ट्रेन में चोरी की घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में रेलवे ने फैसला लिया कि गेट के पास वाली खिड़की में ज्यादा रॉड बनाई जाएंगी।
मगर आपके मन में अब सवाल आ रहा होगा कि अगर चोरी की इतनी घटनाएं होती हैं तो फिर रेलवे ने अन्य खिड़कियों में रॉड की संख्या कम क्यों रखी? तो इसके पीछे की वजह आपको बताते हैं।
दरअसल, जब भी ट्रेन किसी अन्य रास्ते पर खड़ी होती है तो तब कोच के गेट के पास वाली खिड़की में हाथ डालकर चोरी करना चोरों के लिए काफी आसान हो जाता था।
चोर गेट पर बनी सीढ़ियों पर चढ़ते थे और खिड़की पर हाथ डालकर सामान आराम से चुरा लिया करते थे। इससे वे बच भी जाते थे। बाकी खिड़कियों से कुछ चुरा पाना ऊंचाई के चलते काफी मुश्किल हो जाता था। मगर गेट के पास वाली खिड़की से आसान होता था।
चोरी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने गेट के पास वाली खिड़कियों में रॉड ज्यादा लगाने का फैसला लिया। रेलवे का ये फैसला काफी अच्छा भी साबित हुआ।
अब रॉड ज्यादा होने से चोरों के लिए खिड़की में हाथ डालना काफी मुश्किल हो गया था। इससे चोरी की घटनाओं में काफी गिरावट आई।