बचपन अनाथालय में बिताया, सफाईकर्मी और अखबार बाट कर खर्चा निकाला, फिर UPSC पास कर बने IAS

क्या आप भी यही सोचते हैं कि यूपीएससी की तैयारी हम से नहीं हो पाएगी? अगर ऐसा ख्याल आता है, तो आप कोशिश करने से हिचकते हैं। क्योंकि कोशिश करने से आप जानेंगे कि हम लोगों के पास बहुत दिमाग है, बस उसे सही जगह लगाते नहीं है, और मेहनत सभी करना जानते हैं, तो लक्ष्य बनाइये उसे पाने की निरंतर कोशिश करिये और देखिए ऐसा कुछ नहीं जो हम नहीं कर सकते हैं....शायद यही सोच रही होगी बी अब्दुल नासर की, जिनका बचपन अनाथालय में बीता लेकिन सपने हमेशा आसमान छूने के देखें...पढ़ें IAS बी अब्दुल नासर की प्रेरणादायक कहानी

Authored by: नीलाक्ष सिंहUpdated Aug 23 2025, 14:21 IST
​बचपन अनाथालय में बिताया, सफाईकर्मी और अखबार बाट कर खर्चा निकाला, फिर UPSC पास कर बने IAS​Image Credit : TNN Edit01 / 07

​बचपन अनाथालय में बिताया, सफाईकर्मी और अखबार बाट कर खर्चा निकाला, फिर UPSC पास कर बने IAS​

​बी अब्दुल नासर आज आईएएस हैं, लेकिन एक समय था जब उनका बचपन अनाथालय में बीत रहा था, कभी सफाईकर्मी बनकर खर्चा निकाल रहे थे, तो कभी अखबार बाटकर। बी अब्दुल नासर की सक्सेस स्टोरी हर उस उम्मीदवार को अलग दृष्टिकोण दिखाती है, जो इस तरह की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, या करने से हिचकते हैं।​

मेहनत, लगन, जुनून और अनुशासन से पाई सफलताImage Credit : TNN Edit02 / 07

मेहनत, लगन, जुनून और अनुशासन से पाई सफलता

IAS अधिकारी बनने का प्रवेश द्वार, UPSC सीएसई परीक्षा है। इसे भारत की दूसरी सबसे कठिन परीक्षा माना गया है, लोग इसकी तैयारी के लिए अक्सर महंगी कोचिंग और वर्षों की कड़ी पढ़ाई करते हैं। हालांकि ऐसे भी लोग हैं, जो बिना कोचिंग के पहले प्रयास में इस परीक्षा का पास कर लेते हैं, यानी साफ है कि परीक्षा को पास करने के लिए मेहनत, लगन, जुनून और अनुशासन होना चाहिए, इन चारों चीजों के लिए जितना समर्पित रहेंगे, उतनी जल्दी सफलता पाएंगे। रही बात कठिनाइयों की या परेशानियों की, तो गौर से देखिए किसके सामने कठिनाई या परेशानी नहीं आती, जीवन बेहतर बनाना है तो बहाने बनाने बंद करने होंगे ।

कष्टो से भरा था शुरुआती जीवनImage Credit : TNN Edit03 / 07

कष्टो से भरा था शुरुआती जीवन

​केरल के कन्नूर जिले के थालास्सेरी के रहने वाले बी अब्दुल नासर ने जीवन के शुरुआती दिनों में ही काफी कठिनाइयों का सामना किया, पांच साल की उम्र में उनके पिता का देहांत हो गया। नतीजतन, उन्हें और उनके भाई-बहनों को एक अनाथालय भेज दिया गया, जबकि उनकी मां ने उनका पालन-पोषण करने के लिए एक घरेलू सहायिका के रूप में काम किया। इन शुरुआती संघर्षों के बावजूद, नासर ने अपनी शिक्षा पूरी की और कुल 13 साल अनाथालय में बिताए।​

IAS बनने से पहले बी अब्दुल नासर ने कौन-कौन से छोटे-मोटे काम किए?​Image Credit : TNN Edit04 / 07

IAS बनने से पहले बी अब्दुल नासर ने कौन-कौन से छोटे-मोटे काम किए?​

​10 साल की उम्र में, नासर ने अपने परिवार की मदद के लिए एक लोकल होटल में सफाई और सप्लायर के रूप में काम किया। कैसे तैसे करके ग्रेजुएशन तक पढ़ाई पूरी की। स्नातक के लिए थालास्सेरी के सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया। पढ़ाई के दौरान, नासर ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अखबार बाटे, ट्यूशन क्लास ली और फोन ऑपरेटर के रूप में भी काम किया।​

यूपीएससी परीक्षा पास किए बिना बी. अब्दुल नासर आईएएस कैसे बने?​Image Credit : TNN Edit05 / 07

यूपीएससी परीक्षा पास किए बिना बी. अब्दुल नासर आईएएस कैसे बने?​

​1994 में, बी. अब्दुल नासर ने स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद केरल स्वास्थ्य विभाग में अपना करियर शुरू किया। समर्पण और कड़ी मेहनत से, उन्होंने वर्षों में पदोन्नति हासिल की और 2006 तक राज्य सिविल सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंच गए।​

असाधारण प्रदर्शन के लिए मिला प्रमोशन​Image Credit : TNN Edit06 / 07

असाधारण प्रदर्शन के लिए मिला प्रमोशन​

​अपने पूरे करियर के दौरान, उन्होंने लगातार उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया और एक विशिष्ट सेवा रिकॉर्ड बनाया। आईएएस नियमों के अनुसार उनके असाधारण प्रदर्शन के परिणामस्वरूप उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में पदोन्नति मिली। उन्होंने 2019 से 2021 तक कोल्लम के जिला कलेक्टर के रूप में उत्कृष्ट सेवा की और वर्तमान में केरल सरकार के मत्स्य विभाग के सचिव के पद पर हैं। उनका अंतिम लक्ष्य पारंपरिक परीक्षा के माध्यम से नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर अथक समर्पण से परिभाषित करियर के माध्यम से प्राप्त हुआ।​

लक्ष्य को पाने के लिए क्या है जरूरी​Image Credit : TNN Edit07 / 07

लक्ष्य को पाने के लिए क्या है जरूरी​

​उनकी कहानी सम्मोहक होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी है, ये कहानी बताती है, संसाधन का मुंह न देखिए, लक्ष्य बनाइये और उसे पूरा करने की पूरी कोशिश करें। लक्ष्य को पाने की यात्रा में दृढ़ता की जरूरत है, नाकि निगेटिविटी को देखने की।​

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