जरूरी नहीं कि लक्ष्य हमेशा एकेडमिक लेवल पर स्पष्ट हो, हम समय रहते कभी टारगेट तय कर सकते हैं और उसमें जीजान से लग सकते हैं। ऐसी ही एक कहानी है मीशा सिंह की, जिन्होंने एल.एल.बी के बाद ठाना कि वो यूपीएससी परीक्षा में शामिल होंगी और उसे पास करके दिखाएंगी। उनके दृढ़निश्चय ने उन्हें दो बार फेल होने के बावजूद निराश नहीं होने दिया। यही कारण था कि तीसरे प्रयास में उन्होंने अच्छे नंबरों से UPSC पास की और IAS अधिकारी बनीं, पढ़ें उनके सफर के बारे में
मीशा सिंह गांव की पृष्ठभूमि से आने वाली एक छात्रा हैं, उनके पिता का नाम आनंद सिंह है, जबकि माता का नाम विनोद कंवर है। मीशा हमेशा से समझती थीं कि अपने व परिवार की जिंदगी बदलनी है तो कुछ बड़ी पढ़ाई करनी होगी। यही एक मात्र तरीका है कि आप अपने परिवार के संघर्ष को कम या खत्म कर सकते हैं, इसलिए उन्होंने सबसे पहले हायर स्टडी करने की ठानी।
मीशा सिंह ने डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश से प्रशासनिक विधि में बी.ए. और एल.एल.बी. की उपाधि प्राप्त की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अफसर बनने का सपना देखा और UPSC की तैयारी शुरू कर दी। वे समझती थी कि लगातार की गई मेहनत से ही अच्छी खेती होती है, इसलिए पढ़ाई में भी निरंतर मेहनत और कोशिश करनी होगी।
मीशा सिंह की जबरदस्त सोच ने उन्हें कड़ी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया। UPSC की तैयारी के दौरान उन्हें दो बार असफलता मिली, लेकिन उनके कदम नहीं रुके, उन्होंने तीसरे अटेम्प्ट में न केवल सफलता प्राप्त की बल्कि IAS Officer बनने का सपना भी पूरा किया।
साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली मिशा सिंह अपनी मेहनत से ये साबित कर दिया कि आप समय रहते कभी भी करियर बदल सकते हैं। सपना तय कर सकते हैं, और उसे पाने के लिए आसपास के वातावरण से भी प्रोत्साहित हो सकते हैं।
मीशा सिंह अपने हर अटेम्प्ट को एनालिसिस करती थीं, वे आगे बढ़ने के लिए पिछली गलतियों को सुधारती थीं। उन्होंने शुरुआती दो असफलताओं को कायदे से एनालिसिस किया, यही कारणा था कि तीसरी बार में कोई गलती नहीं की और 64वीं रैंक के साथ शानदार तरीके से आईएएस रैंक हासिल की।
मीशा सिंह 2016 बैच की IAS अफसर हैं। मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस मीशा सिंह ने रतलाम कलेक्टर का कार्यभार संभाला, इससे पहले वे जबलपुर में अपर कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं।