कामयाबी की राह हर किसी के लिए एक सी नहीं होती। कुछ लोगों को ये सही वक्त और बिना कठिन रास्ते तय किए मिल जाती है, वहीं कईयों को इस राह तक पहुंचने के लिए तपस्या करनी पड़ती है। वैसे तो यूपीएससी का एग्जाम अपने आप से किसी तपस्या से कम नहीं है लेकिन जिस महिला की आज बात करने जा रहे हैं, उसके लिए ये नामुमकिन सा था। मगर फिर भी सारी हदों को तोड़कर इस महिला ने वो मुकाम पाया, जो शायद ही कोई सोच सकता हो। हम बात कर रहे हैं आईएएस अधिकारी आयुषी डबास की, जिन्होंने वो कर दिखाया, जिसे जानने के बाद देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्र जाहिर तौर पर प्रेरित होंगे।
कई सिविल सेवक होते हैं, जिनकी कहानी अपने आप में काफी प्रेरणादायी होती है। ऐसी ही एक अधिकारी हैं आयुषी डबास, जिन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा एक बार नहीं दो बार नहीं बल्कि पांच-पांच प्रयासों के बाद क्लीयर की। इन दिनों वे चर्चा में हैं।
वैसे तो अपनी मुश्किल जर्नी को लेकर आयुषी हमेशा से स्टूडेंट्स और लोगों के बीच चर्चा का विषय रही हैं मगर हाल ही में अमिताभ बच्चन के मशहूर शो केबीसी में वे नजर आईं। आयुषी ने इस दौरान कई सवालों के सही-सही जवाब देकर 25 लाख रुपये अपने नाम किए। ऐसे में वे सुर्खियों में छा गई और लोगों को याद आई उनकी मुश्किल यूपीएससी की जर्नी की।
जरा सोच कर देखिये कि आम छात्रों के लिए अगर सिविल सेवा परीक्षा मुश्किल होती है तो ऐसे इंसान के लिए कितनी मुश्किल होगी जिसे ठीक से दिखाई भी ना देता हो। बचपन से ही दृष्टिबाधित होने के बावजूद आयुषी डबास ने दिन-रात मेहनत कर यूपीएससी का एग्जाम क्रैक किया। दृष्टिहीनता को कमजोरी समझने वालों के लिए वाकई आयुषी एक मिसाल हैं।
रानीखेड़ा निवासी आयुषी ने साल 2012 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद शिक्षिका की नौकरी की। इसके बाद इतिहास में इग्नू से डिग्री ली। साल 2015 में अपनी मां की प्रेरणा से उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से यूपीएससी में 48वीं रैंक हासिल की। आयुषी बचपन से ही दृष्टिबाधित (100 % Visually Impaired) थीं।
आयुषी की मां एक सीनियर नर्सिंग अफसर थीं। वे अपनी बेटी को आईएएस बनाना चाहती थीं। मां ने आयुषी की यूपीएससी की जर्नी को आसान बनाने के लिए 100 से भी ज्यादा किताबों का ऑडियो रिकॉर्ड करवाया। आयुषी की मां से लोगों को हमेशा यही शिकायत रहती थी कि वे बेटी को लेकर इतना परेशान क्यों रहती हैं।
लोग कहते थे कि वैसे भी पढ़-लिखकर आयुषी क्या ही कर लेगी। मगर इस बात का जवाब कभी आयुषी की मां ने नहीं दिया बल्कि यूपीएससी की परीक्षा पास कर खुद आयुषी ने सबको दिया। आयुषी ने अपने पांचवे प्रयास में यूपीएससी का एग्जाम क्लीयर किया। ये इस बात को समझने के लिए काफी है कि आयुषी ने हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद पांचवी कोशिश में उन्हें 48वीं रैंक (AIR 48) हासिल हुई।
आयुषी को अफसर बनाने में उनके अलावा किसी की मेहनत है तो वो है उनकी मां। मां ने आयुषी पर भरोसा कर दिन-रात उन्हें पढ़ाया और उनके लिए ऑडियो बुक्स भी बनाए। आयुषी की मां ने अपनी नौकरी तक छोड़ दी ताकि वो बेटी को अच्छी तरह से पढ़ा सके। साल 2022 में आयुषी ने अपने पांचवे प्रयास में यूपीएससी का एग्जाम 48वीं रैंक के साथ क्लीयर किया।