कई सफल आईएएस अधिकारी अक्सर स्कूल की परीक्षाओं में कम अंक आने या अव्वल न आ पाने की अपनी कहानियां साझा करते हैं। लेकिन बार बार या सीधे शब्दो में कहें तो 10 बार राज्य पीसीएस में मिली असफलता की कहानी शायद ही पढ़ी होगी। एक आईएएस बनने के लिए लगन, दृढ़ता और आत्मविश्वास की जरूरत होती है। कई बार तीनों होने के बावजूद भी सफलता नहीं मिलती, इसके पीछे एक कारण हो सकता है वो है - हर बार पहले से बेहतर कोशिश न करना
इन कहानी का उद्देश्य उन छात्रों को प्रेरित करना है जो भले कम अंक पाते हैं, लेकिन सपना हमेशा बड़ा देखते हैं। स्कूल के अंक कभी आपकी क्षमता का अंतिम प्रतिबिंब नहीं हैं। यूपीएससी परीक्षा भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, हर साल लाखों युवा इसे पास करने का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ ही सफल हो पाते हैं। आज इस लेख में हम आपको आईएएस अवनीश शरण की एक ऐसी ही प्रेरक कहानी बताएंगे, जो अपने शुरुआती दिनों में एक औसत छात्र थे। लेकिन उन्होंने कभी अपनी उम्मीदों को कम नहीं होने दिया और यूपीएससी परीक्षा पास करके IAS Officer बने।
IAS Awanish Sharan का प्रारंभिक जीवन साधारण रहा। उन्होंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की और 10वीं कक्षा में 44.7 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। हालांकि, 12वीं में 65 प्रतिशत अंक प्राप्त करके उन्होंने आत्मविश्वास प्राप्त किया। उन्होंने आगे स्नातक किया, जिसमें 60 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
Awanish Sharan ने CDS और CPF दोनों परीक्षाओं में भाग लिया, लेकिन पास नहीं कर सके। उन्होंने राज्य पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा भी कई बार दी, जिसमें उन्हें 10 बार असफलता का सामना करना पड़ा। फिर भी, कोशिश करना नहीं छोड़ा, वे जानते थे कि वे हर असफलता से कुछ सीख रहे हैं, अपनी तैयारी का विश्लेषण कर रहे हैं, और शायद इसी आदत ने उन्हें उनका सपना पूरा करने में मदद की। सिविल सेवा (UPSC CSE) के अपने पहले प्रयास में, वे साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन इसके आगे सेलेक्शन नहीं हुआ। हार न मानते हुए, उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अंततः अपने दूसरे प्रयास में 77वीं रैंक हासिल की।
अवनीश शरण की कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने आखिरकार (IAS Awanish Sharan Batch) 2009 में सिविल सेवक बनने का गौरत दिया। वह वर्तमान में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में तैनात हैं।
2022 में, उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी कक्षा 10 की मार्कशीट पोस्ट की, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें 700 में से केवल 314 अंक मिले हैं। यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और यह प्रभावशाली संदेश फैलाया कि शैक्षणिक अंक किसी की क्षमता को परिभाषित नहीं करते, बल्कि कड़ी मेहनत और लगन ही परिभाषित करते हैं।