हमारे देश की ज्यादातर नदियों के नाम देवताओं, भौगोलिक जगहों या फिर ऐतिहासिक घटनाओं के नाम पर रखे गए हैं। जिस नदी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, उसका नाम भी कुछ इसी वजह से पड़ा है। ये नदी भारत के कर्नाटक राज्य में बहती है।
बेशक इस नदी का नाम काली नदी हो, लेकिन इसका पानी दूसरी नदियों के मुकाबले ज्यादा साफ और गहरा दिखाई पड़ता है। वेस्टर्न घाट में कुशावली गांव के पास इस नदी का उद्गम है। जहां से लेकर कारवार के पास अरब सागर में 184 किलोमीटर तक ये नदी अपने साथ कई सारे रहस्यों को समेटे हुए है।
इस नदी के नाम की बात करें तो इसे काली नदी कहने के पीछे की वजह काफी दिलचस्प है। इस नदी का गहरा रंग मैंगनीज से भरपूर नदी तल की वजह से है मगर इसकी वजह इस नदी के दिखने की भी है।
काली नदी उत्तरी कर्नाटक के लिए लाइफलाइन की तरह है ठीक वैसे ही जैसे कि गंगा नदी। ये नदी 400000 लोगों के जीवन का सहारा है। जो लोगों को पानी, जीवन, रोटी और एक अनोखा एक्सपीरियंस देती है।
काली नदी को इसके नाम की वजह से कई बार गलत भी समझ लिया जाता है। लोगों को लगता है कि ये नदी शापित होगी या फिर इसका पानी पीने लायक नहीं होगा। लेकिन ये नदी लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा है।
नदी अपने रास्ते में भरपूर मिनरल्स लेकर चलती है। इसकी मिट्टी में आयरन भरपूर मात्रा में है। असल में ऐसा नहीं है कि मिनरल पानी को काला बनाते हैं। पास से देखने पर ये नदी काफी साफ और गहरी नजर आती है।
जहां ये नदी बहती है, उस जंगल के कुछ हिस्सों में सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंचती। ऐसे में काली के किनारे घने जंगल की वजह से गहरी परछाईं बनती है। जब घने जंगल का रिफ्लेक्शन पानी में मिलता है, तो नदी और भी गहरी दिखती है।