सिविल सर्विसेज की तैयारी करने में जो एक बात सबसे जरूरी है वो है निरंतर व पहले से बेहतर कोशिश करते रहना। अगर आप छात्र हैं तो आप जानते हैं ये देश की सबसे कठिन परीक्षा है, इसे पास करने के लिए अच्छी स्ट्रेटजी के साथ घंटो की पढ़ाई, नोट्स बनाना, फोकस करना ही काफी नहीं है। आपको बड़ा पाने के लिए कई बार छोटे झटके भी सहने होंगे। ये कहानी भी एक ऐसे शख्स की है, जिसने UPSC की तैयारी की ऐसी ठानी कि चार बार मिली असफलता को सफलता की सीढ़ी बनाता गया।
बहादुरगढ़ के रहने वाले आदित्य ने NIT प्रयागराज से ग्रेजुएशन किया है। ग्रेजुएशन के बाद, उन्होंने कुछ समय के लिए टाटा मोटर्स में काम किया, जहां उनकी बहुत अच्छी सैलरी थी। लेकिन उनका सपना IAS बनना था, इसलिए उन्होंने UPSC की तैयारी के लिए सोचा।
उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी और UPSC परीक्षा की तैयारी मन से शुरू कर दी। सीखने वाली बात ये है कि अच्छी खासी पैसे वाली नौकरी छोड़ने के बावजूद उन्होंने तैयारी के बीच किसी को नहीं आने दिया। उन्हें शुरू में चार साल असफलता मिली, लेकिन वे निराश होने की जगह पहले से बेहतर कोशिश करते रहे।
चार बार की असफलता किसी को भी निराश कर सकती है, लेकिन जिनके इरादों में विजय हो वो बार बार कोशिश करने से नहीं डरते हैं। उनकी यह यात्रा लगन, अनुशासन और परिवार के अटूट समर्थन का उदाहरण बनी, उन्होंने पांचवी कोशिश में अपने सपने को पूरा किया, आज वे IAS अफसर हैं।
आदित्य विक्रम अग्रवाल ने अपनी पाचवी कोशिश में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की, जो कि शानदार रैंक है। यूपीएससी पास करना और एआईआर टॉप 10 में आना लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा की बात है। क्योंकि ये ऐसी विजय है तो अपनी गलतियों से सीखते सीखते मिली।
अग्रवाल ने UPSC मेन्स लिखित परीक्षा में 854 अंक और इंटरव्यू में 173 अंक हासिल किए, जिससे उनका कुल स्कोर 1027 हो गया। ऐसा नहीं था कि उन्हें बिल्कुल भी निराशा नहीं होती थी, उन्होंने कहा, "कई बार मैं निराश हुआ, लेकिन मेरे माता-पिता, बहन और दोस्तों ने हर मुश्किल में मेरा साथ दिया। उनके प्रोत्साहन से मुझे आगे बढ़ने में मदद मिली।"
आदित्य ने हर स्टेज पर लगातार अपना बेहतरीन एकेडमिक प्रदर्शन दिखाया है। 2012 में, उन्होंने SR सेंचुरी स्कूल, CBSE में 10वीं क्लास में 9.8 का CGPA स्कोर किया। 2014 में, उन्होंने उसी स्कूल से 12वीं क्लास में PCM में 96.8% हासिल किए और झज्जर जिले के टॉपर बने।