सिंगोड़ी का लजीज स्वाद लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको उत्तराखंड आना होगा। उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल दोनों जगह सिंगोड़ी मिलती है। लेकिन अल्मोड़ा और श्रीनगर की सिंगोड़ी की बात ही कुछ और है।
उत्तराखंड कुमाऊं मंडल और गढ़वाल मंडल दो हिस्सों में बंटा हुआ है। यहां कुमाऊं में 6 और गढ़वाल में कुल 7 जिले हैं। अल्मोड़ा को कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी भी माना जाता है। यहां के व्यंजन भी काफी लजीज होते हैं।
अगर आप सिंगोड़ी का असली स्वाद लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अल्मोड़ा आना होगा। क्योंकि अल्मोड़ा की वादियों में जब आप पत्ते में लिपती सिंगोड़ी खाएंगे तो वादियों के नजारे के साथ इसके स्वाद में खो जाएंगे।
सिंगोड़ी का मालू के पत्ते में लपेटकर ही सर्व किया जाता है। मालू नाम की यह बेल पहाड़ों में खूब होती है। पत्तों के कोन में सिंगोड़ी मिठाई को भरने के बाद उसे फ्रिज कर दिया जाता है। ताकि पत्ते का फ्लेवर भी उसमें घुल जाए।
सिंगोड़ी को मावा से बनाया जाता है, इसलिए यह जल्दी खराब हो जाती है। यही कारण है कि इसका असली स्वाद लेने के लिए आपको पहाड़ों में ही जाना होगा। मावा के अलावा इसमें चीनी, नारियल, इलायची पाउडर और बादाम भी होता है।
अल्मोड़ा जा ही रहें हैं तो सिंगोड़ी के साथ ही यहां की मशहूर बाल मिठाई का टेस्ट जरूर लें। क्योंकि बाल मिठाई का ऐसा टेस्ट कहीं और नहीं मिलेगा। बता दें कि अल्मोड़ा अपनी मिठाइयों के लिए खासा मशहूर है।
सिंगोड़ी बहुत ही स्वाष्टि होती है, लेकिन ध्यान रखें कि इसमें कैलोरी भी बहुत होती हैं। इसलिए स्वाद के चक्कर में ज्यादा न खाएं।