मानसून की विदाई का मतलब है कि दक्षिण-पश्चिमी मानसून का देश से वापस लौटना और बारिश का मौसम खत्म होना। यह आमतौर पर सितंबर के बीच से अक्टूबर के बीच होता है। इस दौरान उत्तर-पश्चिम भारत से बारिश देने वाला मानसून पीछे हटने लगता है और मौसम सूखा होने लगता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है जिसमें हवाएं उत्तर भारत से हटकर दक्षिण की ओर चलने लगती हैं, जिससे कई इलाकों में बारिश कम हो जाती है।
फिलहाल राजस्थान में एक बार फिर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, दूसरी तरफ मानसून सीजन की विदाई शुरू होने वाली है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में मानसून की विदाई 15 सितंबर के आसपास शुरू होगी। जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर में फिलहाल परिस्थितियां इसकी गवाही भी दे रही हैं। 17 सितंबर को 9 जिलों बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर और बांसवाड़ा में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
पिछले पांच सालों के रिकॉर्ड बताते हैं कि दिल्ली में मानसून की विदाई अक्सर सामान्य तारीख से देर से हुई है। साल 2024 में यह 2 अक्टूबर को हुआ था, जबकि 2023 में 30 सितम्बर और 2022 में 29 सितम्बर को मानसून गया था। 2021 में तो यह 8 अक्टूबर तक रुका रहा और 2020 में भी यह 1 अक्टूबर को विदा हुआ था। इन आंकड़ों से साफ है कि मानसून की विदाई लगातार देरी से हो रही है।
दिल्ली ने इस साल बारिश के मामले में भी कई रिकॉर्ड तोड़े। आईएमडी के मुताबिक, राजधानी में अगस्त महीने में 400.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 72 प्रतिशत ज्यादा है। यह पिछले 15 सालों में अगस्त की सबसे ज्यादा बारिश है। इससे पहले 2010 में अगस्त महीने में 455.8 मिलीमीटर बारिश हुई थी।
दिल्ली में इस बार मानसून का आगमन भी जल्दी हुआ था। मौसम विभाग ने 29 जून को मानसून के आने की घोषणा की थी, जबकि सामान्य तारीख 8 जुलाई है। यानी इस बार मानसून नौ दिन पहले पहुंचा। देशभर में 1 जून से 31 अगस्त तक 743.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो दीर्घकालीन औसत से 6 प्रतिशत अधिक रही। इसमें उत्तर-पश्चिम भारत ने सबसे ज्यादा योगदान दिया और दिल्ली इस दौरान बारिश के मामले में सबसे आगे रहा।
मानसून की वापसी हमेशा पश्चिम राजस्थान से शुरू होती है और धीरे-धीरे उत्तर और पूर्व की ओर बढ़ती है। इस बार भी IMD ने संकेत दिया है कि इसकी शुरुआत राजस्थान से होगी। लेकिन दिल्ली के लिए फिलहाल कोई स्पष्ट तारीख तय नहीं की गई है। दिल्ली से मानसून की सामान्य विदाई 25 सितम्बर के आसपास होती है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून का यह पैटर्न चिंता का विषय है। एक तरफ इसकी शुरुआत पहले हो रही है, तो दूसरी ओर विदाई लगातार देर से हो रही है। इसका असर किसानों, जल प्रबंधन और शहरी जीवन पर पड़ रहा है। दिल्ली में इस बार अधिक बारिश से राहत भी मिली और जलजमाव और ट्रैफिक जाम जैसी परेशानियां भी सामने आईं।