ऋषिकेश की यात्रा अपने आप में अद्भुत होती है। गंगा किनारे बसे इस शहर में जीवन के कई रंग दिखते हैं, जिसमें डिवोशन से लेकर थ्रिल, सेरेनिटी, प्राकृतिक अचंभे शामिल हैं और यह सब आपको ऊर्जा से भर देते हैं। अगर आप ऋषिकेश आ रहे हैं तो कहीं भी जाएं, लेकिन इन पांच जगहों पर जरूर जाएं, थैक्यू आप बाद में भी कह सकते हैं।
ऋषिकेश आए हैं तो इस शहर के बीच में मौजूद भारत मंदिर में दर्शन करने जरूर जाएं। महाभारत और पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर को आदि गुरु शंकराचार्य ने दोबारा बनवाया था। मंदिर की बनावट और यहां पत्थरों पर की गई कारीगरी, भारत की पुरातन संस्कृति का जीता-जागता कैनवस हैं। मंदिर में अंदर जाते ही आपको शांति और श्रद्धा का अनुभव होगा।
ऋषिकेश में गंगा नदी के किनारे बना यह 13 मंजिला मंदिर योग नगरी का एक लैंडमार्क है। मंदिर का हर फ्लोर अलग-अलग देवी-देवताओं को समर्पित है। मंदिर की सबसे ऊपरी मंजिल से गंगा नदी का बहुत ही शानदार नजारा दिखता है। मंदिर की घंटियों की मधुर धुन और वातावरण आत्मा को छू जाता है।
जी हम बिहार की राजधानी पटना की बात नहीं कर रहे हैं। यह पटना वाटरफॉल ऋषिकेश में ही मौजूद है और मशहूर लक्ष्मण झूला से सिर्फ 6-7 किमी कू दूरी पर जंगल के बीच मौजूद है। यहां पहुंचकर आप तरोताजा महसूस करेंगे। पटना वाटरफॉल तक पहुंचने के लिए आपको एक छोटा सा ट्रैक करना पड़ेगा।
ऋषिकेश में गंगा नदी के किनारे बना परमार्थ निकेतन शहर का बड़ा स्प्रिचुअल हब है। यहां हर रोड सैकड़ों लोग योग, मेडिटेशन के लिए आते हैं। परमार्थ निकेतन की गंगा आरती में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक और साधु-संत भी शामिल होते हैं।
त्रिवेणी घाट, ऋषिकेश के सबसे नामी घाटों में से एक है। यहां की गंगा आरती अद्भुत होती है। यहां मिट्टी के दीयों की रोशनी, मंत्रोचार और गंगा की धारा में तैरते दीये अनोखा नजारा पेश करते हैं। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि गंगा आरती में शामिल होने से पापों का नाश होता है और मानसिक शांति मिलती है।