रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में पर्सनल लोन लेने का सबसे बड़ा और प्राथमिक कारण 'मेडिकल इमरजेंसी' है। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और अचानक आने वाली बीमारियों के खर्च ने मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। जब बचत कम पड़ जाती है और स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) पर्याप्त नहीं होता, तो लोगों के पास इलाज के लिए तुरंत पर्सनल लोन लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
एक तरफ जहां मजबूरी है, वहीं दूसरी तरफ 'शानो-शौकत' की चाहत भी है। रिपोर्ट बताती है कि एक बड़ा वर्ग अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर दिखाने के लिए भी लोन ले रहा है। इसमें महंगे गैजेट्स खरीदना, ब्रांडेड कपड़े या घर के लग्जरी सामान के लिए कर्ज लेना शामिल है। सोशल मीडिया के दौर में "दिखावे की संस्कृति" ने लोगों को कर्ज लेने के लिए प्रेरित किया है।
अब लोग वेकेशन पर जाने के लिए साल भर बचत करने के बजाय 'Travel Loan' लेना पसंद कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, युवाओं के बीच 'अभी घूमो, बाद में चुकाओ' (Travel Now, Pay Later) का ट्रेंड बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और महंगे हॉलिडे डेस्टिनेशन के लिए पर्सनल लोन लेने वालों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले काफी उछाल आया है।
यह एक खतरनाक आर्थिक संकेत है। कई लोग अपने पुराने क्रेडिट कार्ड बिल या किसी अन्य छोटे कर्ज को चुकाने के लिए 'डेट कंसोलिडेशन' (Debt Consolidation) के नाम पर पर्सनल लोन ले रहे हैं। यानी एक कर्ज को खत्म करने के लिए दूसरा बड़ा कर्ज लेना, जो उन्हें लंबे समय के लिए ब्याज के जाल में फंसा देता है।
भारत में शादियां हमेशा से एक बड़ा ईवेंट रही हैं, लेकिन अब मध्यम वर्ग भी अपनी हैसियत से बाहर जाकर खर्च कर रहा है। डेस्टिनेशन वेडिंग और भव्य आयोजनों के लिए लोग 10 से 20 लाख रुपये तक का पर्सनल लोन आसानी से ले रहे हैं। यह खर्च अक्सर उनकी सालों की जमा पूंजी से कहीं अधिक होता है।
महंगाई के इस दौर में उच्च शिक्षा काफी महंगी हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई कामकाजी पेशेवर (Working Professionals) खुद को अपस्किल करने या महंगे सर्टिफिकेशन कोर्स करने के लिए भी लोन का सहारा ले रहे हैं। हालांकि इसे एक निवेश माना जाता है, लेकिन इसके लिए पर्सनल लोन की उच्च ब्याज दरें चुकाना एक बड़ी चुनौती है।
पर्सनल लोन की बढ़ती संख्या के पीछे तकनीक का भी बड़ा हाथ है। अब बैंक या फिनटेक ऐप्स महज 5 से 10 मिनट में लोन अप्रूव कर देते हैं। बिना किसी गारंटी और कम कागजी कार्रवाई के तुरंत पैसा हाथ में आने की वजह से लोग बिना सोचे-समझे लोन ले लेते हैं, जो बाद में भारी EMI के रूप में परेशान करता है।