केंद्रीय बजट 2026-27 की आहट के साथ ही शेयर बाजार में एक बार फिर बेचैनी बढ़ गई है। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो बजट से ठीक पहले निवेशकों का सतर्क होना और बाजार पर दबाव दिखना एक आम बात रही है। हालांकि, ये आंकड़े यह भी तस्दीक करते हैं कि यह गिरावट महज अस्थायी होती है और बजट घोषणाओं के बाद बाजार अक्सर शानदार वापसी (Recovery) करता है।
बाजार को अनिश्चितता पसंद नहीं है। बजट से पहले निवेशकों के मन में कई सवाल होते हैं क्या टैक्स बढ़ेगा? क्या नई सब्सिडी आएगी? जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, निवेशक बड़े दांव लगाने से बचते हैं। यही वजह है कि बजट के कुछ दिन पहले बाजार में खरीदारी कम और सतर्कता ज्यादा दिखाई देती है।
शेयर बाजार की घबराहट का सबसे बड़ा कारण टैक्स होता है। निवेशकों को हमेशा डर रहता है कि कहीं सरकार 'कैपिटल गेन टैक्स' (LTCG या STCG) में बढ़ोतरी न कर दे। अगर टैक्स बढ़ता है, तो निवेशकों का शुद्ध मुनाफा कम हो जाता है, जिससे वे पहले ही बिकवाली करना शुरू कर देते हैं।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले कई सालों में बजट से ठीक पहले बाजार ने अक्सर नकारात्मक या सपाट रिटर्न दिया है। ऐतिहासिक रूप से, बजट के दिन और उससे पहले के हफ्ते में वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) अपने चरम पर होती है। निवेशक 'प्रॉफिट बुकिंग' करना बेहतर समझते हैं ताकि किसी भी नकारात्मक घोषणा से बचा जा सके।
बाजार की नजर इस बात पर रहती है कि सरकार का खर्चा उसकी कमाई से कितना ज्यादा है। अगर सरकार बजट में खर्चों को लेकर बहुत ज्यादा आक्रामक होती है, तो राजकोषीय घाटा बढ़ने का डर रहता है। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेशकों (FIIs) के भरोसे पर पड़ता है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FIIs) बजट से पहले काफी सतर्क हो जाते हैं। वे भारतीय बाजार की नीतियों में स्थिरता देखना चाहते हैं। बजट की घोषणाओं के इंतजार में विदेशी निवेशक अक्सर अपना पैसा निकालना शुरू कर देते हैं या नया निवेश रोक देते हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ जाता है।
हर बजट में कुछ सेक्टर 'हीरो' होते हैं तो कुछ को निराशा हाथ लगती है। उदाहरण के लिए, अगर बाजार को उम्मीद है कि बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर खर्च बढ़ेगा, तो उन कंपनियों के शेयर चढ़ते हैं। वहीं, शराब, सिगरेट या लग्जरी आइटम पर ड्यूटी बढ़ने की आशंका इन सेक्टरों के शेयरों को नीचे गिरा देती है।
दिलचस्प बात यह है कि बाजार की असली चाल बजट के दौरान और उसके ठीक बाद शुरू होती है। अगर बजट में 'ग्रोथ' और 'सुधार' पर जोर दिया जाता है, तो बजट से पहले की सारी घबराहट गायब हो जाती है और बाजार में शानदार तेजी देखने को मिलती है। इसे अक्सर 'पोस्ट-बजट रैली' कहा जाता है।