भारत में कई शहर अपनी खास पहचान के लिए जाने जाते हैं। कहीं इमारतें प्रसिद्ध हैं, कहीं संस्कृति और कहीं खाना। लेकिन महाराष्ट्र का नागपुर शहर अपनी एक खास फल पहचान के लिए पूरे देश में जाना जाता है। इसे ऑरेंज सिटी ऑफ इंडिया यानी भारत का संतरा शहर कहा जाता है। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यहां संतरे की खेती और व्यापार बहुत बड़े स्तर पर होता है और यह शहर की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। हालांकि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा पशुपालन विभाग द्वारा जारी 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार देश में मंदारिन (जिसमें मौसमी, किन्नू और संतरा शामिल हैं) के उत्पादन में मध्य प्रदेश ने टॉप स्थान हासिल किया है। आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में इस वर्ष कुल 2,285.91 हजार मीट्रिक टन मंदारिन का उत्पादन दर्ज किया गया, जो देश के कुल उत्पादन में 33.97 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। यह राज्य को इस श्रेणी में देश का सबसे बड़ा उत्पादक बनाता है। वहीं महाराष्ट्र 1,474.85 हजार मीट्रिक टन उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जिसकी हिस्सेदारी 21.92 प्रतिशत रही। इस तरह दोनों राज्यों ने मिलकर देश के मंदारिन उत्पादन का बड़ा हिस्सा अपने नाम किया है।
नागपुर और इसके आसपास का क्षेत्र विदर्भ कहलाता है। यहां की जमीन और जलवायु संतरे की खेती के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है। गर्म मौसम, संतुलित बारिश और उपजाऊ मिट्टी के कारण यहां संतरे की खेती लंबे समय से होती आ रही है। माना जाता है कि 19वीं सदी में इस क्षेत्र में संतरे की खेती की शुरुआत हुई थी और धीरे-धीरे यह एक बड़े कृषि व्यवसाय में बदल गई।
नागपुर में उगने वाले संतरे अपनी मिठास और हल्की खटास के लिए बहुत मशहूर हैं। इनका रंग चमकदार नारंगी होता है और इनमें रस भी भरपूर मात्रा में होता है। यही वजह है कि ये संतरे देशभर के बाजारों में पसंद किए जाते हैं। यहाँ के किसानों ने वर्षों तक खेती के तरीकों को सुधारकर इन संतरे की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया है।
नागपुर संतरे को भौगोलिक संकेत (Geographical Indication - GI) टैग भी मिला है। इसका मतलब है कि यह फल खास तौर पर इसी क्षेत्र की पहचान है और इसकी गुणवत्ता इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। यह टैग मिलने से नागपुर संतरे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिली है और इसकी मांग और भी बढ़ गई है।
नागपुर में संतरे सिर्फ खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक बड़ा व्यापार भी है। शहर के बाजारों में संतरे की बड़ी-बड़ी मंडियां लगती हैं जहां किसान और व्यापारी बड़ी मात्रा में खरीद-बिक्री करते हैं। रेल और सड़क मार्ग से यह संतरे देश के कई हिस्सों में भेजे जाते हैं। सीजन के समय पूरे शहर में संतरे की रौनक देखने को मिलती है।
नागपुर और इसके आसपास केवल एक ही तरह के संतरे नहीं उगाए जाते। यहां किन्नू, वैलेंसिया और कभी-कभी ब्लड ऑरेंज जैसी किस्में भी मिलती हैं। किन्नू अपने रस और स्वाद के लिए जाना जाता है, जबकि वैलेंसिया का इस्तेमाल ज्यादातर जूस बनाने में होता है। ब्लड ऑरेंज दुर्लभ होते हैं लेकिन स्वाद और रंग के कारण बहुत खास माने जाते हैं।
संतरे की खेती नागपुर और विदर्भ क्षेत्र के हजारों किसानों की आजीविका का आधार है। इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट, पैकिंग, व्यापार और जूस उद्योग से जुड़े कई लोग भी इस पर निर्भर हैं। यह फल केवल एक कृषि उत्पाद नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ बन चुका है।
नागपुर की पहचान अब केवल एक शहर के रूप में नहीं बल्कि “ऑरेंज सिटी” के रूप में भी होती है। यहां आने वाले पर्यटक अक्सर संतरे खरीदने और स्थानीय बाजार देखने जरूर जाते हैं। रेलवे स्टेशन और सड़क किनारे भी संतरे और उनसे बने उत्पाद आसानी से मिल जाते हैं। इस तरह संतरा नागपुर की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और पहचान का एक अहम हिस्सा बन चुका है।