अगर आपके मौजूदा लोन की ब्याज दर और नए बैंक की दर में कम से कम 0.50% से 1% का अंतर हो, तो रीफाइनेंस पर विचार किया जा सकता है। छोटी बचत के लिए ट्रांसफर करना फायदेमंद नहीं होता।
अगर आपने हाल ही में लोन लिया है और टेन्योर का बड़ा हिस्सा बाकी है तो रीफाइनेंस से ज्यादा फायदा मिल सकता है। शुरुआती वर्षों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है, इसलिए कम दर पर ट्रांसफर करने से अच्छी बचत हो सकती है।
अगर आपकी आय में बदलाव हुआ है और EMI भारी पड़ रही है तो नए बैंक से कम ब्याज दर या लंबी अवधि लेकर EMI घटाई जा सकती है। इससे मासिक बजट संतुलित करना आसान हो जाता है।
कई बैंक कम प्रोसेसिंग फीस, लचीली प्रीपेमेंट सुविधा या बेहतर कस्टमर सर्विस जैसी अतिरिक्त सुविधाएं देते हैं। सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, पूरी शर्तों की तुलना करें।
अगर लोन लेने के बाद आपका CIBIL स्कोर बेहतर हुआ है तो अब आपको पहले से कम ब्याज दर मिल सकती है। अच्छा स्कोर रीफाइनेंस के समय आपके पक्ष में काम करता है।
रीफाइनेंस करते समय प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्ज, वैल्यूएशन फीस और अन्य शुल्क जोड़कर कुल लागत निकालें। कभी-कभी ट्रांसफर की लागत बचत से ज्यादा हो सकती है।
अगर आप फिक्स्ड रेट पर हैं और बाजार में दरें कम हो गई हैं, तो फ्लोटिंग रेट चुनना लाभदायक हो सकता है। वहीं, दरें बढ़ने की आशंका हो तो फिक्स्ड रेट सुरक्षा दे सकता है।
बार-बार लोन ट्रांसफर करने से क्रेडिट प्रोफाइल प्रभावित हो सकता है और अतिरिक्त चार्ज भी बढ़ते हैं। इसलिए सोच-समझकर और लंबी अवधि के लाभ को ध्यान में रखकर फैसला लें।