सिलिकॉन वैली में एआई के क्षेत्र में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा चल रही है। कंपनियां अरबों डॉलर खर्च करके सबसे स्मार्ट एलएलएम (Language Learning Models) बनाने में लगी हैं। इसी के साथ काम का माहौल भी बेहद कड़ी मेहनत वाला होता जा रहा है। उन्हें लगता है कि एआई एक नई तकनीक है जहां अभी जीतने वाले को भविष्य में भरपूर लाभ मिलेगा। और हर कोई विजेता बनना चाहता है। दरअसल जहां कई एआई स्टार्टअप सबसे अच्छे और सबसे स्मार्ट एआई मॉडल बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुरानी और विवादास्पद सिक्स डे वर्क कल्चर फिर से ऑफिस में लौट रही है। आइए जानते हैं 996 वर्क कल्चर क्या है।
कई स्टार्टअप अब 9 से 9 बजे तक, हफ्ते में 6 दिन (72 घंटे) काम करने की कल्चर को अपना रहे हैं। इसे 996 वर्क कल्चर कहा जाता है, जो लंबे समय से चर्चा में है।
स्टार्टअप्स मानते हैं कि एआई तकनीक में जल्द सफलता पाना जरूरी है, क्योंकि जो पहले जीतता है वह भविष्य में सबसे ज्यादा फायदा उठाएगा। इसलिए वे अधिक मेहनत और लंबे समय तक काम करने को जरूरी समझते हैं।
996 कल्चर मूल रूप से चीन के अलीबाबा के संस्थापक जैक मा द्वारा लोकप्रिय किया गया था, लेकिन इसे आधुनिक गुलामी कहा गया। चीन की सुप्रीम कोर्ट ने इसे 2021 में गैरकानूनी घोषित किया।
चीन के मुकाबले अमेरिका की कंपनियां भी इस मॉडल को अपना रही हैं, खासकर एआई क्षेत्र में। कई कंपनियों ने नौकरी के लिए उम्मीदवारों से 996 में काम करने की इच्छा जताने को कहा है।
खासकर जनरेशन Z के लोग, जो स्टीव जॉब्स और बिल गेट्स जैसी सफलता की कहानियां सुनकर बड़े हुए हैं, वे इस मेहनत वाली संस्कृति को अपनी पहचान मानने लगे हैं।
लगातार लंबे समय तक काम करने से तनाव बढ़ता है, जिससे कर्मचारी जल जाते हैं। रिसर्च से पता चला है कि अधिक तनाव से कंपनी की उत्पादकता भी घटती है।
भारतीय आईटी जगत में भी लंबे काम के घंटे चर्चा में रहे हैं। भारत के आईटी दिग्गज और सिलिकॉन वैली के स्टार्टअप्स के CEO ने इस विषय पर अलग-अलग विचार व्यक्त किए हैं, जिन पर आलोचना और समर्थन दोनों मिला है।