विश्व बैंक और वैश्विक रिज़र्व डेटा के अनुसार, देश के पास Officially Reported Silver Reserves में दर्ज जो मात्रा होती है, वही उसकी आधिकारिक “भंडार क्षमता” कहलाती है। ये वह चांदी है जो देश ने खोज-खोज कर अपनी जमीन से निकाली है और अब तक भंडार के रूप में सुरक्षित रखी है। इसे औकात या पॉकेट की ताक़त की तरह समझा जा सकता है।
पेरू दुनिया में सबसे बड़े चांदी के भंडार वाला देश है। इसके पास करीब 120,000 टन से भी ज़्यादा अनुमानित चांदी भंडार है। दक्षिण अमेरिका में स्थित यह देश चांदी उत्पादन में सदियों से अग्रणी रहा है। स्पेनिश काल से ही पेरू चांदी उत्खनन (Mining) में विश्व का ध्यान केंद्रित करता रहा है। यही वजह है कि इसका रिज़र्व बाक़ी दुनिया से भिन्न रूप से बड़ा है।
दुनिया में चांदी भंडार में मेक्सिको दूसरे नंबर पर है। करीब 98,000 टन तक का रिज़र्व होने का अनुमान है। मेक्सिको में सोना–चांदी के बड़े प्लेस मौजूद हैं और ये देश सालाना भी चांदी उत्पादन में टॉप पर आता है। इसकी वजह उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी और बेहतर माइनिंग टेक्नोलॉजी है।
चीन का नाम अक्सर सोने और अन्य कीमती धातुओं के भंडार में उभरता है, लेकिन चांदी में भी यह तीसरे स्थान पर है। चीन के पास करीब 55,000 टन का अनुमानित भंडार है। वहां की इंडस्ट्री ख़ासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और फोटोग्राफ़ी ही चांदी की भारी मांग का कारण है। यही कारण है कि अपने ही इस्तेमाल के साथ-साथ भंडार भी बनाया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया लगभग 43,000 टन चांदी अपने पास रखता है। यह देश रत्न और धातुओं के भंडार के लिए जाना जाता है सोना, तांबा, चांदी सभी बड़े स्तर पर पाए जाते हैं। इसकी वजह यह है कि ऑस्ट्रेलिया की पर्पटी (Geological Structure) धातुओं की खान (Ore) के लिए बेहद उपयुक्त है।
पोलैंड ऐसे ही अनोखे देशों में से एक है जिसका चांदी भंडार करीब 30,000 टन आंका गया है। यह संख्या अन्य यूरोपीयन देशों से कहीं ज़्यादा है। पोलैंड का इतिहास चांदी आधारित इंडस्ट्री से पुराना रहा है और यहाँ माइनिंग की तकनीक सुरक्षित व बड़े पैमाने पर विकसित है।
भारत विश्व का बड़ा सोना उपभोक्ता ज़रूर है, मगर चांदी के भंडार के मामले में शीर्ष 5 देशों में शामिल नहीं है। भारत में चांदी उत्खनन बहुत सीमित है और ज़्यादातर चांदी आयात पर निर्भर है। यही वजह है कि चांदी के बढ़ते दाम का असर सीधे बाजार पर पड़ता है और भंडार कम होने से भारत का हिस्सा सूची में नहीं दिखता।
चांदी सिर्फ आभूषण के लिए नहीं, बल्कि इंडस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, बैटरी और मेडिकल उपकरणों में भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है। वैश्विक मांग बढ़ने के साथ-साथ सप्लाई सीमित होने की वजह से दाम रिकॉर्ड स्तर पर हैं। और जब दुनिया भर के रिज़र्व देशों के पास चांदी जमा है, तो इसका असर रेट्स और निवेश दोनों पर देखा जाता है।