इन परियोजनाओं के तहत नागदा-मथुरा, गुंतकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर रेल खंडों पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी। ये सभी मार्ग पहले से ही काफी व्यस्त हैं, जहां ट्रेनों की संख्या ज्यादा होने के कारण भीड़भाड़ रहती है।
सरकार का कहना है कि नई रेल लाइनों के बनने से ट्रेनों की आवाजाही तेज और सुगम होगी। इससे यात्रियों को समय पर ट्रेन मिलने की संभावना बढ़ेगी और देरी की समस्या कम होगी। साथ ही, यात्रा अधिक आरामदायक और सुरक्षित भी बनेगी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये परियोजनाएं रेलवे की परिचालन क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगी। अधिक लाइनों के कारण ट्रेनों का संचालन बेहतर तरीके से हो सकेगा और रेलवे सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
इन परियोजनाओं का फायदा मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुल 19 जिलों को मिलेगा। करीब 901 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी, जिससे करीब 4,161 गांवों की करीब 83 लाख आबादी को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।
नई रेल लाइनों से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। इनमें महाकालेश्वर मंदिर, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन और नैमिषारण्य जैसे प्रसिद्ध स्थान शामिल हैं। इससे पर्यटन उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।
ये रेल मार्ग माल ढुलाई के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, इस्पात और उर्वरक जैसे सामान की ढुलाई अब और तेज व आसान हो जाएगी। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से हर साल करीब 6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी।
रेल मंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं से पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। इससे तेल आयात में करीब 37 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन में 185 करोड़ किलोग्राम तक की गिरावट होगी। यह कमी करीब 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर मानी जा रही है।