पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार की इन सात योजनाओं ने सामाजिक और आर्थिक ढांचे में व्यापक बदलाव लाने का प्रयास किया है। इन पहलों का प्रभाव विभिन्न वर्गों तक पहुंचा है, विशेषकर गरीब और ग्रामीण समुदायों तक। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के विस्तार और प्रभावशीलता पर और अधिक ध्यान केंद्रित होने की संभावना है। आइए उन सात कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानते हैं।
2014 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य हर नागरिक को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना था। इसके तहत करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए, जिससे सीधे सरकारी लाभ ट्रांसफर (DBT) संभव हुआ। इस योजना ने वित्तीय समावेशन को मजबूत किया और गरीब वर्ग को औपचारिक बैंकिंग से जोड़ा।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लक्ष्य गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराना था। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक ईंधन जैसे लकड़ी और कोयले पर निर्भरता कम हुई। यह योजना महिला स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को पक्के घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया। सरकार ने लाखों घरों के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी। इस पहल ने “सबके लिए आवास” के लक्ष्य को आगे बढ़ाया और कई परिवारों को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया।
आयुष्मान भारत योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इसके तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष लाखों रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना ने गरीब वर्ग के लिए गंभीर बीमारियों के इलाज को सुलभ बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत देश को खुले में शौच मुक्त बनाने के उद्देश्य से की गई थी। लाखों शौचालयों का निर्माण किया गया और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाई गई। इस मिशन ने ग्रामीण भारत में स्वच्छता ढांचे को मजबूत किया और स्वास्थ्य सुधार में योगदान दिया।
डिजिटल इंडिया मिशन का उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है। सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन किया गया, जिससे पारदर्शिता और गति बढ़ी। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को प्रतिवर्ष आर्थिक सहायता दी जाती है, जो सीधे प्रत्येक पात्र किसानों साल में 6000 रुपये बैंक खातों में ट्रांसफर होती है। इससे किसानों को कृषि खर्चों में कुछ राहत मिलती है और उनकी आय स्थिर करने का प्रयास किया गया है।