ITR Filing: पुरानी टैक्स व्यवस्था या नई टैक्स व्यवस्था, चुनने से पहले इन 6 बातों पर करें विचार

इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) ने इस वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नए टैक्स फॉर्म अधिसूचित किए हैं, जिनमें ITR-1, ITR-2, ITR-3, ITR-4 and ITR-5 शामिल हैं। कुछ ही दिनों में विभाग एक्सेल यूटिलिटी भी शेयर करेगा। इसके बाद टैक्सपेयर्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर प्रीलोडेड फंक्शनलिटी के साथ आसानी से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करना शुरू कर सकते हैं। इस बीच एक महत्वपूर्ण विचार जो महत्व रखता है, वह है पुरानी टैक्स रिजीम (Old tax regime) और नई टैक्स व्यवस्था (New tax regime) के बीच चुनाव। अगर आप भी दोनों रिजीम में से कौन सा चुना जाये तो इनमें से चुनाव के बारे में सोच रहे हैं, तो ये कुछ कारक हैं जिन पर आपको विचार करना चाहिए।

Authored by: रामानुज सिंहUpdated May 9 2025, 15:07 IST
​कम टैक्स स्लैब​Image Credit : Istock01 / 06

​कम टैक्स स्लैब​

नई टैक्स व्यवस्था (एनटीआर) आपको कम टैक्स स्लैब का दावा करने का अधिकार देती है, जबकि आप इनकम टैक्स कटौती का दावा करने में असमर्थ हैं।

​कटौतियां​Image Credit : Istock02 / 06

​कटौतियां​

पुरानी टैक्स व्यवस्था में, आप सेक्शन 80C, 80D, 80DD और 80U के तहत सभी कटौतियों का दावा करने में सक्षम हैं, लेकिन आय अपेक्षाकृत उच्च टैक्स दर पर टैक्स योग्य है।

​HRA छूट​Image Credit : Istock03 / 06

​HRA छूट​

पुरानी टैक्स व्यवस्था टैक्सपेयर्स को HRA छूट का दावा करने की अनुमति देती है। वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए यह सेक्शन 10(13A) के तहत छूट प्राप्त है। यह नई टैक्स व्यवस्था में नहीं दिया गया है।

​उधार ली गई पूंजी पर ब्याज​Image Credit : Istock04 / 06

​उधार ली गई पूंजी पर ब्याज​

नई टैक्स व्यवस्था में, स्व-कब्जे वाली संपत्ति के लिए उधार ली गई पूंजी पर ब्याज को होम प्रॉपर्टी से आय से कटौती के रूप में अनुमति नहीं है। जब टैक्सपेयर्स स्व-कब्जे वाले घर के लिए उधार ली गई पूंजी पर ब्याज की कटौती का दावा करना चाहता है, तो टैक्स् को पुरानी टैक्स व्यवस्था चुननी चाहिए।

​87A के तहत छूट​Image Credit : Istock05 / 06

​87A के तहत छूट​

पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत, टैक्सपेयर्स को ₹5 लाख तक की आय के लिए धारा 87A के तहत इनकम टैक्स छूट का दावा करने की अनुमति है, जबकि नई टैक्स व्यवस्था में इसे बढ़ाकर ₹7 लाख (वित्त वर्ष 2023-24 के लिए) कर दिया गया है। बजट 2025 में, इस सीमा को बढ़ाकर ₹12 लाख कर दिया गया।

​मानक कटौती​Image Credit : Istock06 / 06

​मानक कटौती​

पुरानी टैक्स व्यवस्था में ₹50,000 की मानक कटौती की अनुमति है, जबकि नई टैक्स व्यवस्था में इसे 2024 में बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है।

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