IPO में GMP क्या होता है, रजिस्ट्रार और बुक रनिंग लीड मैनेजर का क्या काम

IPO GMP: शेयर बाजार में जब भी किसी नए आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफर) की घोषणा होती है, तो निवेशकों में इसे लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है। खासतौर पर छोटे निवेशक कम समय में मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद में आईपीओ की ओर आकर्षित होते हैं। कई बार लिस्टिंग गेन शानदार होते हैं, लेकिन कई बार निवेशकों को नुकसान भी उठाना पड़ता है। ऐसे में आईपीओ में पैसा लगाने से पहले इससे जुड़े अहम पहलुओं को समझना बेहद जरूरी हो जाता है।

Authored by: रामानुज सिंहUpdated Jan 20 2026, 12:56 IST
​क्या होता है GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम)​Image Credit : Istock01 / 07

​क्या होता है GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम)​

आईपीओ से जुड़े सबसे चर्चित शब्दों में से एक है जीएमपी यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम। यह एक अनौपचारिक संकेत होता है, जो यह बताता है कि किसी आईपीओ के शेयर लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में कितने प्रीमियम पर ट्रेड हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी आईपीओ का इश्यू प्राइस 100 रुपये है और जीएमपी 40 रुपये चल रहा है, तो माना जाता है कि शेयर 140 रुपये के आसपास लिस्ट हो सकता है।

​जीएमपी पर क्यों नहीं करना चाहिए पूरी तरह भरोसा​Image Credit : Istock02 / 07

​जीएमपी पर क्यों नहीं करना चाहिए पूरी तरह भरोसा​

हालांकि जीएमपी निवेशकों को बाजार की धारणा का अंदाजा देता है, लेकिन यह पूरी तरह भरोसेमंद नहीं होता। यह न तो सेबी द्वारा नियंत्रित होता है और न ही इसकी कोई कानूनी मान्यता होती है। कई बार ऊंचे जीएमपी के बावजूद शेयर कमजोर लिस्ट होते हैं, जबकि कुछ आईपीओ बिना जीएमपी के भी शानदार लिस्टिंग देते हैं। इसलिए सिर्फ जीएमपी देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

​रजिस्ट्रार की क्या होती है भूमिका​Image Credit : Istock03 / 07

​रजिस्ट्रार की क्या होती है भूमिका​

आईपीओ प्रक्रिया में रजिस्ट्रार की भूमिका बेहद अहम होती है। रजिस्ट्रार वह संस्था होती है जो निवेशकों से मिले आवेदनों को संभालती है, शेयरों का अलॉटमेंट करती है, रिफंड की प्रक्रिया पूरी करती है और डीमैट अकाउंट में शेयर ट्रांसफर कराती है। आसान शब्दों में कहें तो रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करता है कि किस निवेशक को कितने शेयर मिलेंगे और पैसा सही तरीके से एडजस्ट हो।

​निष्पक्षता और पारदर्शिता का जिम्मा​Image Credit : Istock04 / 07

​निष्पक्षता और पारदर्शिता का जिम्मा​

रजिस्ट्रार का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना होता है कि शेयर आवंटन की प्रक्रिया निष्पक्ष, सटीक और समय पर पूरी हो। भारत में लिंक इनटाइम इंडिया, केफिन टेक्नोलॉजीज और एमयूएफजी इंटाइम जैसी कंपनियां प्रमुख रजिस्ट्रार के रूप में काम करती हैं। निवेशकों को अलॉटमेंट स्टेटस और रिफंड से जुड़ी जानकारी इन्हीं के जरिए मिलती है।

​बुक रनिंग लीड मैनेजर क्या करता है​Image Credit : Istock05 / 07

​बुक रनिंग लीड मैनेजर क्या करता है​

बुक रनिंग लीड मैनेजर (बीआरएलएम) आईपीओ की पूरी योजना और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालता है। यह आमतौर पर बड़ी निवेश बैंक या ब्रोकरेज फर्म होती हैं, जो कंपनी को आईपीओ का साइज, प्राइस बैंड और बाजार से मिलने वाली संभावित मांग तय करने में मदद करती हैं। बीआरएलएम ही बड़े संस्थागत निवेशकों से बातचीत करता है और इश्यू को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

​मार्केटिंग से लेकर अंडरराइटिंग तक जिम्मेदारी​Image Credit : Istock06 / 07

​मार्केटिंग से लेकर अंडरराइटिंग तक जिम्मेदारी​

बीआरएलएम आईपीओ की मार्केटिंग करता है, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रोड शो आयोजित करता है और अंडरराइटर्स, रजिस्ट्रार व अन्य मध्यस्थों के साथ तालमेल बनाकर काम करता है। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, कोटक महिंद्रा कैपिटल और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स जैसी संस्थाएं अक्सर इस भूमिका में नजर आती हैं। इनके सही प्रबंधन से ही आईपीओ को अच्छा रिस्पॉन्स मिल पाता है।

​निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान​Image Credit : Istock07 / 07

​निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान​

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को सिर्फ जीएमपी के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। कंपनी का बिजनेस मॉडल, मुनाफे का रिकॉर्ड, कर्ज की स्थिति, भविष्य की योजनाएं और जोखिम से जुड़े फैक्टर भी उतने ही जरूरी हैं। आईपीओ के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) को ध्यान से पढ़ना चाहिए, जो सेबी, एनएसई और बीएसई की वेबसाइट पर उपलब्ध होता है। समझदारी इसी में है कि निवेशक अफवाहों के बजाय ठोस जानकारी और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही आईपीओ में निवेश करें।

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