न फोन पर बात करते हैं न ही जाते हैं घर...बजट से पहले क्यों ‘लॉक’ हो जाते हैं अधिकारी?

हर साल केंद्रीय बजट पेश होने से पहले सरकार एक बेहद सख्त और गोपनीय प्रक्रिया अपनाती है, जिसे ‘लॉक-इन पीरियड’ कहा जाता है। इस दौरान बजट से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और तकनीकी स्टाफ पूरी तरह से एक तय परिसर में बंद कर दिए जाते हैं। न वे बाहर जा सकते हैं, न किसी से फोन पर बात कर सकते हैं। इसका मकसद बजट की जानकारी को लीक होने से बचाना होता है।

Authored by: रिचा त्रिपाठीUpdated Jan 22 2026, 13:20 IST
​कब और कैसे शुरू होता है लॉक-इन पीरियड?​01 / 07

​कब और कैसे शुरू होता है लॉक-इन पीरियड?​

लॉक-इन पीरियड की शुरुआत आमतौर पर हलवा सेरेमनी के बाद होती है। यह रस्म बजट छपाई शुरू होने का संकेत मानी जाती है। जैसे ही हलवा सेरेमनी खत्म होती है, वैसे ही बजट से जुड़े सभी अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक या बजट प्रेस परिसर में ‘लॉक’ कर दिए जाते हैं। इसके बाद बजट पेश होने तक वे वहीं रहते हैं।

​क्यों जरूरी है इतनी सख्ती?​Image Credit : Canva02 / 07

​क्यों जरूरी है इतनी सख्ती?​

बजट देश का सबसे संवेदनशील सरकारी दस्तावेज होता है। इसमें टैक्स, सब्सिडी, योजनाएं और नीतिगत फैसले शामिल होते हैं। अगर इसकी जानकारी पहले लीक हो जाए, तो शेयर बाजार में हेराफेरी, आर्थिक नुकसान और राजनीतिक विवाद हो सकता है। इसी वजह से सरकार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेती।

​फोन और इंटरनेट पर क्यों लगती है पूरी रोक?​Image Credit : Canva03 / 07

​फोन और इंटरनेट पर क्यों लगती है पूरी रोक?​

लॉक-इन के दौरान अधिकारियों के मोबाइल फोन जमा कर लिए जाते हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया, ईमेल और किसी भी तरह के बाहरी संपर्क पर पूरी तरह रोक रहती है। यहां तक कि परिवार से भी संपर्क की इजाजत नहीं होती। यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी जानकारी बाहर न जा सके।

​कहां रहते हैं अधिकारी और क्या सुविधाएं मिलती हैं?​Image Credit : Canva04 / 07

​कहां रहते हैं अधिकारी और क्या सुविधाएं मिलती हैं?​

लॉक-इन पीरियड के दौरान अधिकारियों को उसी परिसर में ठहराया जाता है, जहां बजट की छपाई होती है। उनके खाने-पीने, रहने और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। हालांकि सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन आज़ादी नहीं होती। यह समय पूरी तरह काम और गोपनीयता के लिए समर्पित होता है।

​कितने दिन तक चलता है लॉक-इन पीरियड?​Image Credit : Canva05 / 07

​कितने दिन तक चलता है लॉक-इन पीरियड?​

लॉक-इन पीरियड आमतौर पर 7 से 10 दिन तक चलता है। यह अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि बजट कितना बड़ा है और छपाई में कितना समय लग रहा है। बजट पेश होने के बाद ही अधिकारियों को बाहर जाने और फोन इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है।

​डिजिटल जमाने में भी क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?​Image Credit : Canva06 / 07

​डिजिटल जमाने में भी क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?​

भले ही आज सब कुछ डिजिटल हो गया हो, लेकिन बजट की छपाई और अंतिम दस्तावेज अब भी बेहद सुरक्षित तरीके से तैयार किए जाते हैं। साइबर लीक, डेटा चोरी और हैकिंग के खतरे को देखते हुए सरकार मानती है कि मानव स्तर पर सख्ती आज भी उतनी ही जरूरी है।

​बजट पेश होते ही खत्म होता है ‘लॉक’ Image Credit : Canva07 / 07

​बजट पेश होते ही खत्म होता है ‘लॉक’

जैसे ही वित्त मंत्री संसद में बजट भाषण पढ़ना शुरू करती हैं, उसी समय लॉक-इन पीरियड खत्म मान लिया जाता है। इसके बाद अधिकारी अपने फोन वापस पा लेते हैं और घर जा सकते हैं। तब जाकर वे अपने परिवार से संपर्क कर पाते हैं और इस लंबी गोपनीय ड्यूटी से बाहर आते हैं।

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