Budget 2026: बजट में बांटने के लिए सरकार के पास कहां से आता है इतना पैसा? यहां समझिये हर 1 रुपए का लेखाजोखा

हर साल बजट से आम जनता, नौकरीपेशा, किसान, कारोबारी और टैक्सपेयर्स सभी को बड़ी उम्मीदें रहती हैं। हर साल बजट के समय लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि सरकार के पास खर्च करने के लिए इतना पैसा आखिर आता कहां से है और इसे खर्च कहां किया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो बजट सरकार की कमाई और खर्च का पूरा हिसाब-किताब होता है। आइए समझते हैं कि सरकार के 1 रुपये की कमाई कहां से आती है और वह कहां खर्च होता है।

Authored by: रिचा त्रिपाठीUpdated Dec 22 2025, 10:25 IST
सरकार की कमाई और खर्च में क्यों होता है अंतर​Image Credit : Canva01 / 08

सरकार की कमाई और खर्च में क्यों होता है अंतर​

आमतौर पर सरकार की कमाई (रेवेन्यू) से ज्यादा उसका खर्च होता है। विकास योजनाएं, सैलरी, पेंशन, सब्सिडी, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े खर्चों के चलते सरकार की इनकम कम पड़ जाती है। इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ता है। इसी वजह से हर बजट में सरकार यह भी बताती है कि उसे साल भर में कितना कर्ज लेना होगा।

​बॉरोइंग से आता है सबसे ज्यादा पैसा​Image Credit : Canva02 / 08

​बॉरोइंग से आता है सबसे ज्यादा पैसा​

बजट दस्तावेजों के मुताबिक, सरकार की कुल आय का सबसे बड़ा हिस्सा बॉरोइंग यानी कर्ज से आता है। करीब 28 फीसदी पैसा सरकार बॉन्ड्स और अन्य माध्यमों से उधार लेती है। यह कर्ज घरेलू और विदेशी निवेशकों से लिया जाता है। सरकार के लिए कर्ज जुटाने का काम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) करता है।

​इनकम टैक्स का योगदान​Image Credit : Canva03 / 08

​इनकम टैक्स का योगदान​

सरकार की कमाई में दूसरा बड़ा स्रोत इनकम टैक्स है। कुल रेवेन्यू का करीब 19 फीसदी हिस्सा इनकम टैक्स से आता है। इसमें नौकरीपेशा लोगों, प्रोफेशनल्स और अन्य टैक्सपेयर्स द्वारा दिया गया टैक्स शामिल होता है। जैसे-जैसे देश की आमदनी बढ़ती है, इनकम टैक्स से होने वाली कमाई भी बढ़ती है।

​जीएसटी और कॉरपोरेट टैक्स की भूमिका​Image Credit : Canva04 / 08

​जीएसटी और कॉरपोरेट टैक्स की भूमिका​

जीएसटी से सरकार को करीब 18 फीसदी रेवेन्यू मिलता है। इसके अलावा कंपनियों से लिया जाने वाला कॉरपोरेट टैक्स लगभग 17 फीसदी योगदान देता है। ये दोनों टैक्स सरकार की आय के मजबूत स्तंभ माने जाते हैं और अर्थव्यवस्था की रफ्तार से सीधे जुड़े होते हैं।

​अन्य टैक्स और नॉन-टैक्स इनकम​Image Credit : Canva05 / 08

​अन्य टैक्स और नॉन-टैक्स इनकम​

केंद्र सरकार को सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी और कस्टम ड्यूटी से कुल मिलाकर करीब 9 फीसदी पैसा मिलता है। इसके अलावा नॉन-टैक्स रेवेन्यू जैसे डिविडेंड, फीस, ब्याज और सरकारी कंपनियों की कमाई से करीब 7 फीसदी आय होती है। नॉन-डेट कैपिटल रिसीट जैसे विनिवेश से लगभग 1 फीसदी पैसा आता है।

​सरकार का पैसा कहां खर्च होता है​Image Credit : Canva06 / 08

​सरकार का पैसा कहां खर्च होता है​

सरकार के कुल खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान और राज्यों को टैक्स में हिस्सेदारी देने में चला जाता है। करीब 20 फीसदी पैसा सिर्फ पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने और राज्यों को उनका हिस्सा देने में खर्च हो जाता है। यह एक अनिवार्य खर्च होता है, जिसे टाला नहीं जा सकता।

​योजनाएं, रक्षा और सब्सिडी पर खर्च​Image Credit : Canva07 / 08

​योजनाएं, रक्षा और सब्सिडी पर खर्च​

सेंट्रल सेक्टर की योजनाओं और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर लगभग 16 फीसदी और 9 फीसदी खर्च होता है। रक्षा क्षेत्र, केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं और वित्त आयोग के जरिए राज्यों को दिए जाने वाले फंड पर करीब 8-8 फीसदी खर्च किया जाता है। वहीं सब्सिडी का हिस्सा करीब 6 फीसदी और पेंशन पर 4 फीसदी खर्च होता है।

​बजट का सीधा असर आम आदमी पर​Image Credit : Canva08 / 08

​बजट का सीधा असर आम आदमी पर​

बजट में सरकार की कमाई और खर्च का संतुलन तय करता है कि टैक्स बढ़ेगा या घटेगा, सब्सिडी मिलेगी या नहीं और विकास योजनाओं पर कितना पैसा खर्च होगा। यही वजह है कि बजट का असर सीधे आम आदमी की जेब, नौकरी, महंगाई और बचत पर पड़ता है।

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