अडानी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड (ANIL) ने भारत में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए गुजरात के कच्छ जिले में देश का पहला ऑफ-ग्रिड 5 मेगावॉट ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह प्लांट पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित है और इसमें बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) भी लगा है, जिससे यह बिना किसी बाहरी बिजली सप्लाई के पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर हाइड्रोजन उत्पादन करता है।(तस्वीर सौजन्य-X/istock)
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य देश को स्वच्छ, स्वदेशी और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर ले जाना है। यह पहल न केवल भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है, बल्कि ऊर्जा आयात पर निर्भरता भी कम करती है।(तस्वीर सौजन्य-X/istock)
यह प्लांट 100% ग्रीन है और एक बंद सर्कुलर इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम पर आधारित है, जो सौर ऊर्जा में उतार-चढ़ाव के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया करता है। इसका मतलब है कि यह प्लांट किसी भी समय हाइड्रोजन उत्पादन को बनाए रख सकता है, चाहे धूप कम हो या ज्यादा। यह प्रणाली प्लांट को सुरक्षित, लचीला और लागत प्रभावी बनाती है।(तस्वीर सौजन्य-X/istock)
इस प्रोजेक्ट ने यह साबित किया है कि रिफाइनरी, उर्वरक कारखानों और भारी वाहनों जैसे क्षेत्रों में भी ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन और उपयोग संभव है। आने वाले समय में यह प्रोजेक्ट अन्य इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए मॉडल के रूप में काम करेगा।(तस्वीर सौजन्य-X/istock)
यह सफल पायलट प्रोजेक्ट अब अडानी ग्रुप के अगले बड़े प्रोजेक्ट की नींव बन चुका है, जिसे गुजरात के मुंद्रा में विकसित किया जाएगा। इस हब के जरिये भारत का ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन बड़े पैमाने पर बढ़ेगा और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।(तस्वीर सौजन्य-X/istock)
एनडीटीवी के मुताबिक अडानी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड, अडानी एंटरप्राइजेज की एक विशेष यूनिट है, जो ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, ग्रीन मेथनॉल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के निर्माण और आपूर्ति में कार्यरत है। मुंद्रा में कंपनी सोलर सेल, मॉड्यूल, विंड टरबाइन और इलेक्ट्रोलाइजर भी बना रही है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतें पूरी की जा सकें।(तस्वीर सौजन्य-X/istock)
हाइड्रोजन एक अत्यंत हल्का और शुद्ध ईंधन है। इसके जलने पर केवल पानी की भाप निकलती है, जिससे यह पूरी तरह प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोत बनता है। यही कारण है कि ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है।(तस्वीर सौजन्य-X/istock)
अडानी ग्रुप का यह प्रयास भारत के लिए तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि है। यह पहल भारत को वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने की दिशा में मजबूत कदम है और आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का संकेत देता है। (तस्वीर सौजन्य-X/istock)