Maratha Reservation: उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी से की अपील, अनु्च्छेद 370 और शाहबानो केस की तरह लें फैसला

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 6, 2021, 06:38 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया है। उसके बाद महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिस तरह से अनुच्छेद 370 और शाहबानो केस में केंद्र ने फैसला किया था ठीक वैसे ही केंद्र सरकार मदद करे।

Maratha Reservation: उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी से की अपील, अनु्च्छेद 370 और शाहबानो केस की तरह लें फैसला

मुंबई। नौकरियों और शिक्षा के संबंध में 50 फीसद मराठा आरक्षण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक निर्णय देते हुए असंवैधानिक करार दिया था। पांच जजों की खंडपीठ ने साफ किया कि आरक्षण की व्यवस्था ना सिर्फ असंवैधानिक थी बल्कि 50 फीसद की निर्धारित सीमा को भी पार कर रही थी। इस विषय पर महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि अदालत का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन वो मानते हैं कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

अनुच्छेद 370 और शाहबानो केस की तरह फैसला ले केंद्र
सुप्रीम  कोर्ट ने कहा कि आरक्षण के संबंध में निर्णय राज्य नहीं ले सकता तो अब क्या। सुप्रीम कोर्ट ने आगे का रास्ता दिखाते हुए कहा कि इस संबंध में फैसला लेने का अधिकार सिर्फ केंद्र और राष्ट्रपति को है। पीएम  नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से आपने आर्टिकल 370 को हटाने के साथ पहले शाहबानो केस में फैसला लिया गया था उसे तरह का फैसला लिया जाना चाहिए। मिस्टर प्राइम मिनिस्टर यह आपका विशेषाधिकार है और आप मदद करिए।

पांच जजों वाली बेंच ने असंवैधानिक बताया
पांच जजों वाली संविधान पीठ ने आरक्षण की वैधता की जांच की, कहा कि किसी भी जाति को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी जाति की सूची में जोड़ने की कोई शक्ति नहीं है।न्यायाधीशों ने कहा, "राज्य केवल जातियों की पहचान कर सकते हैं और केंद्र को सुझाव दे सकते हैं ... केवल राष्ट्रपति ही राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा निर्देशित एसईबीसी सूची में जाति को जोड़ सकते हैं।"

देवेंद्र फडणवीस सरकार ने लिया था फैसला
मराठा कोटा महाराष्ट्र की तत्कालीन देवेंद्र फड़नवीस सरकार द्वारा राजनीतिक शक्तिशाली समुदाय द्वारा व्यापक विरोध के बाद प्रदान किया गया था। इसके पास केंद्र का समर्थन है, जो यह बताता है कि राज्य आरक्षण दे सकते हैं और उनका निर्णय संवैधानिक है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी आरक्षण को बरकरार रखा था, लेकिन इसका फैसला पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दिया था।यह सवाल करते हुए कि अगर कोटा प्रणाली में कोई समानता नहीं है तो समानता की मूल अवधारणा का क्या होता है, सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में एक सुनवाई में कहा, "परिणामी असमानता के बारे में क्या? आप कितनी पीढ़ियों तक जारी रहेंगे। 

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