एमपी में वक्फ संपत्तियों का 150% रजिस्ट्रेशन! किरायेदारों की एंट्री ने बढ़ाई संख्या, मुतवल्लियों में बढ़ी नाराजगी
- Reported by: मकरंद कालेEdited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Dec 8, 2025, 04:19 PM IST
मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जहां कुल संपत्तियों से भी अधिक रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज हो गए। अधिकारियों का तर्क है कि एक ही संपत्ति पर मौजूद कई किरायेदारों की एंट्री ने संख्या को बढ़ा दिया है। इसी बीच अवैध कब्जों और गुमराह किए जा रहे समुदाय को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड (फाइल फोटो)
Madhya Pradesh News: देश के कई राज्यों में वक्फ की संपत्तियों का शून्य रजिस्ट्रेशन हुआ है, लेकिन एमपी तो एमपी है, जो सबसे अजब है, बिलकुल गजब है। यहां के वक्फ बोर्ड ने तो करीब 150% रजिस्ट्रेशन कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों का बड़े पैमाने पर रजिस्ट्रेशन किया गया, अधिकारी कर्मचारियों ने दिन रात मेहनत करके ज्यादा से ज्यादा रजिस्ट्रेशन करने की कोशिश की। नतीजा यह हुआ कि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने टारगेट के मुताबिक 90% वक्फ संपत्तियां पोर्टल में दर्ज करने में सरलता हासिल की लेकिन अब ट्विस्ट यह है कि मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की कुल संख्या 15012 है, और पोर्टल पर 21233 संपत्तियां रजिस्टर्ड नजर आ रही हैं, जहां देश भर में वह संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन में मुश्किल आ रही है, वहीं मध्य प्रदेश में संपत्तियों में बड़ा इजाफा हो गया है।
वक्फ बोर्ड का तर्क क्या है?
अब इस पर वक्फ बोर्ड का तर्क सुनिये। हमने जब इस बारे में वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सनवर पटेल से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कई वक्फ संपत्तियों पर किराए की दुकानें चल रही हैं और उनके अलग-अलग रजिस्ट्रेशन हो गए हैं। ऐसे में एक संपत्ति पर अगर 50 दुकानें हैं तो संपत्तियां उम्मीद पोर्टल पर 51 नजर आ रही हैं। इन सभी दुकानों के अलग-अलग रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, तो ऐसे में 90% रजिस्ट्रेशन के बावजूद रजिस्ट्रेशन 150% हो गया है। ऐसे में मध्य प्रदेश के वक्फ बोर्ड के सामने एक नया सवाल खड़ा हो गया है।।। कि इन संपत्तियों को किस मद में डाला जाए ताकि संख्या सही दिखे।
पोर्टल में किरायेदार का कॉलम नहीं
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि जब तक सभी जिलों की अलग-अलग संपत्तियों की जानकारी उनके पास लिखित में नहीं आ जाती, वह कुल किराए और अन्य संपत्तियों की संख्या नहीं बता पाएंगे। इस बारे में केंद्र सरकार से उम्मीद पोर्टल में अपडेट करने का निवेदन भी मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की तरफ से किया गया है। अब सवाल ये है कि पोर्टल में किरायेदार का कॉलम नहीं है, तो संपत्तियां अलग कैसे की जाएं। इतना ही नहीं वक्फ स्टेट की एक आईडी बनती है लेकिन किराएनामे के चलते एक आईडी पर सैकड़ों संपत्तियां रजिस्टर्ड हैं।
वक्फ की बड़ी संपत्तियों पर अवैध कब्जे
मुतवल्लियों की ओर से इस मामले में लड़ाई लड़ रहे शमशुल हसन से हमने बातचीत की। शमशुल हसन ने कहा की कुछ पॉलीटिशियन जो खुद को मुस्लिम समाज के रहनुमा बताते हैं , उन्होंने मुसलमानों को गुमराह करना शुरू कर दिया है। ऐसे लोग नहीं चाहते कि पोर्टल पर वक्फ की संपत्तियां दर्ज हों, क्योंकि इन लोगों ने वक्फ की बड़ी संपत्तियों पर अवैध कब्जे कर रखे हैं इसलिए वह मुस्लिम समाज को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। जितने भी मुतवल्ली हैं , उन्हें नियम के हिसाब से वक्फ ट्रिब्यूनल में जाकर अपना पक्ष रखना चाहिए, मुस्लिम कौम को लगातार गुमराह किया जा रहा है।