कोटा में खुदकुशी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। नए साल में अब तक सुसाइड के दो मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में कोटा के बोरखेड़ा क्षेत्र में रहने वाली छात्र निहारिका सिंह ने घर पर ही फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। कोटा में लगातार बढ़ते सुसाइड के मामले काफी चिंताजनक है। बता दें कि कोटा मुख्य रूप से IIT-JEE और NEET की तैयारी के प्रसिद्ध है। यहां हर साल लोखों छात्र IIT-JEE और NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। लेकिन लगन से पढ़ाई करने के बावजूद जब बच्चों को सफलता नहीं मिलती तब बच्चे सुसाइड जैसे कदम उठाते हैं। कई छात्र अधिक तनाव और चिंता की वजह से गलत कदम उठाते हैं। ऐसे में, माता-पिता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है कि अपने बच्चों को साथ फ्रेंडली नेचर रखें जिससे इस तरह के कदम बच्चे ना उठाएं। ऐसे में आज हम आपको कुछ पेरेंटिंग टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप बच्चों को गलत कदम उठाने से रोक सकते हैं।
पीएम मोदी ने सभी पेरेंट्स को दी ये सलाह
दूसरे से ना करें तुलना
मेरा बेटा ये करेगा वो करेगा, दूसरों ने किया और मेरे ने नहीं किया तो मैं मुंह दिखाने लायक नहीं रहा- इसे बंद कर दीजिए। पीएम मोदी ने कहा, समाज में पिता किसी और बच्चे की कथा सुनकर घर आते हैं और मन में सोचते हैं कि मेरे बच्चे बेकार हैं। ऐसा करने बंद करें।
बच्चों पर चीजें ना थोपे
आपके बेटे के अंदर जो सामर्थ्य है उसी की चर्चा कीजिए। दूसरों के सामर्थ्य से उसे न देखें। हर बच्चे में कुछ ख़ास होता है। उस पर उधार चीजें न थोपे। बच्चों पर दबाव न डालें। अंक जिंदगी नहीं होती।
Sudha Murty Parenting Tips
बच्चों को दें उनका पर्सनल स्पेस
अगर आप चाहते हैं कि बच्चों में आत्मविश्वास की कमी ना हो तो उन्हें पर्सनल स्पेस दें। इसलिए पेरेंट्स को उनकी पसंद की हॉबी या खेल खेलने की आजादी दें। सुधा मूर्ति इस बात पर जोर देती हैं कि माता-पिता को कभी भी अपने बच्चों पर अपनी पसंद या विचार नहीं थोपने चाहिए।
आदर्श बनें
सुधा मुर्ति का मानना है कि पेरेंट्स की जिम्मेदारी बच्चों पर सिर्फ अपने बनाए नियम लागू करने की नहीं होती है। उनकी जिम्मेदारियों में बच्चों के आगे अच्छे उदाहरण स्थापित करना भी शामिल होता है। ऐसे में पेरेंट्स को बच्चों के आगे रोल मॉडल की तरह काम करें।
सदगुरु के पेरेंटिंग टिप्स
समय
अगर आप चाहते हैं कि बच्चों की अच्छी परवरिश हो तो अपने बच्चों को समय दें। आप बच्चों को जितना ज्यादा समय देंगे आपके बीच की बॉन्डिंग उतनी ज्यादा बेहतर होगी।
घर का माहौल
घर का माहौल बच्चों की परवरिश में बहुत अहम भूमिका निभाता है। अगर आपके घर का माहौल खुशनुमा होगा तो उसका असर बच्चे के व्यवहार में झलकेगा। इसलिए कोशिश करें कि घर का माहौल हमेशा अच्छा रहे।
