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Relationship Tips: रिश्ता या आत्मसम्मान क्या है सही चुनाव? प्रेमानंद महाराज का जवाब सुनकर बदल जाएगी सोच

रिलेशनशिप में अक्सर रिश्ता या आत्मसम्मान बचाने की बात सामने आने लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रिश्ता या आत्मसम्मान दोनों में जरूरी क्या है? आइए जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज के इस सवाल का सटीक जवाब...

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रिश्ता बचाएं या आत्मसम्मान?

Relationship Tips: आज के तेजी से बदलते दौर में रिश्तों की परिभाषा भी बदल रही है। जहां एक ओर लोग अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता देने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर रिश्तों को निभाने की चुनौती भी बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि आजकल रिलेशनशिप में लोग अक्सर इस दुविधा में दिखाई देते हैं, कि रिश्ता बचाएं या आत्मसम्मान? सभी रिश्तो में अक्सर एक ऐसा मोड़ आता है, जब हमें यह तय करना पड़ता है कि रिश्ता बचाएं या आत्मसम्मान? यह सवाल सुनने में जितना आसान है इसका जवाब उतना ही कठिन है। इसी जटिल सवाल का बेहद गहरा और सोच बदल देने वाला उत्तर प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) देते हैं। आइए जानते हैं क्या है उनका जवाब?

क्या है प्रेमानंद महाराज का जवाब?

जब एक महिला ने यही सवाल प्रेमानंद महाराज से पूछा, तो उन्होंने बिना किसी हिचक के जवाब दिया 'रिश्ता'। जी हां पहली नजर में यह जवाब चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक गहरी आध्यात्मिक सोच छिपी है।

महाराज जी के अनुसार, जिसे हम अक्सर आत्मसम्मान समझते हैं, वह वास्तव में 'देहाभिमान' यानी अहंकार होता है। जब हम अपने अहं को रिश्तों से ऊपर रख देते हैं, तब टकराव होता है और दूरी बढ़ना स्वाभाविक हो जाता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में रिश्ते का चुनाव करें, क्योंकि रिश्ता अहंकार से बहुत आगे होता है।

रिश्ता जरूरी या आत्मसम्मान

रिश्ता जरूरी या आत्मसम्मान

आत्मसम्मान और देहाभिमान समझें दोनों का फर्क

प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि असली आत्मसम्मान और अहंकार में बहुत महीन अंतर है। जब हमें हर बात में खुद को सही साबित करना हो तो वह आत्मसम्मान नहीं बल्कि देहाभिमान (Ego) है। वहीं जब हम भीतर से स्थिर और शांत हों तब हम आपने आत्मसम्मान (Self-worth) को सही से पहचान सकते हैं। अक्सर लोग अपनी जिद या अहंकार को आत्मसम्मान का नाम दे देते हैं, जिससे रिश्ते टूटने लगते हैं।

असली आत्मसम्मान क्या है?

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, असली आत्मसम्मान वह है जब आपके सामने वाला व्यक्ति कटु वचन कहे और आप उसे लगातार प्रेम से जवाब दें। यह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति की अटूट निशानी है। ऐसे व्यक्ति को ईश्वर भी पसंद करते हैं, क्योंकि वह अपने भीतर के अहंकार को जीत चुका होता है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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