Terminal Ileitis: टीवी की मशहूर एक्ट्रेस जैस्मीन भसीन की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आने के बाद एक बीमारी अचानक चर्चा में आ गई है, जिसका नाम है टर्मिनल इलिटिस। यह नाम सुनने में भले ही मुश्किल लगे, लेकिन आसान भाषा में समझें तो यह छोटी आंत के आखिरी हिस्से में होने वाली सूजन की समस्या है। जैस्मीन (jasmin bhasin) को दुबई में अचानक तेज दर्द और इंफेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर यह बीमारी क्या होती है, क्यों होती है और क्या यह बहुत खतरनाक है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो आइए इसे समझते हैं।
आखिर टर्मिनल इलिटिस क्या है
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद में सहायक प्रोफेसर एवं वरिष्ठ सलाहकार (डाइजेस्टिव डिजीज, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी विभाग) डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत बताते हैं कि बहुत से लोग आज भी यह नहीं जानते हैं कि हम जो खाना खाते हैं, वह शरीर में जाकर छोटी और बड़ी आंत से होकर गुजरता है। छोटी आंत का सबसे आखिरी हिस्सा टर्मिनल इलियम कहलाता है। जब इस हिस्से में सूजन आ जाती है, तो उसे टर्मिनल इलिटिस कहा जाता है।
बता दें कि यह अपने आप में कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जो कई वजहों से हो सकती है। कुछ लोगों में यह किसी गंभीर इंफेक्शन की वजह से होती है, तो कुछ मामलों में यह आंतों से जुड़ी दूसरी बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। इसलिए इसकी सही वजह जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी होती है।
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जैस्मीन भसीन के साथ क्या हुआ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैस्मीन भसीन अपने जन्मदिन से पहले दुबई गई थीं। वहीं अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तेज इंफेक्शन और आंत में सूजन की शिकायत हुई, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने कुछ समय अस्पताल में रहने की सलाह दी थी, लेकिन जैस्मीन ने आगे का इलाज भारत में कराने का फैसला किया। फिलहाल उनकी सेहत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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टर्मिनल इलिटिस के लक्षण क्या होते हैं
डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत के अनुसार टर्मिनल इलिटिस की समस्या होने पर कई तरह की पेट से जुड़ी समस्याएं आपको लक्षण के रूप में देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को,
- कई दिनों तक पेट दर्द बना रहे
- बार-बार दस्त लगें
- उल्टी या जी मिचलाने की शिकायत हो
- बिना वजह वजन कम होने लगे
- या मल में खून दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जरूरी नहीं कि ये लक्षण टर्मिनल इलिटिस के ही हों, लेकिन ये इस बात का संकेत जरूर हो सकते हैं कि आंतों में कोई समस्या है। ऐसे में खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।
डॉक्टर इस बीमारी का पता कैसे लगाते हैं
डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत कहते हैं कि सिर्फ लक्षण देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी को टर्मिनल इलिटिस है। डॉक्टर मरीज की परेशानी को समझने के बाद जरूरत पड़ने पर खून की जांच, स्कैन या आंत की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। जांच के बाद ही यह पता चलता है कि सूजन किस वजह से हुई है और उसी के हिसाब से इलाज शुरू किया जाता है। इसलिए बिना जांच के किसी भी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं होता।
समय पर इलाज सबसे जरूरी
टर्मिनल इलिटिस का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि इसकी वजह क्या है। अगर परेशानी किसी इंफेक्शन के कारण हुई है, तो उसका इलाज अलग होगा। वहीं अगर इसके पीछे आंतों से जुड़ी कोई दूसरी बीमारी है, तो इलाज भी उसी हिसाब से किया जाएगा। अच्छी बात यह है कि समय पर जांच और सही इलाज मिलने पर ज्यादातर मरीजों की हालत में सुधार हो सकता है। इसलिए अगर पेट से जुड़ी कोई परेशानी लंबे समय तक बनी रहे, तो उसे सामान्य गैस या बदहजमी समझकर टालने की गलती नहीं करनी चाहिए।
