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क्या होता है ब्लैक फ्राइडे, Black Friday पर क्यों लगती है सेल, इस शॉपिंग फेस्टिवल को कैसे मिला ये नाम?

What is Black Friday: पहले ब्लैक फ्राइडे सिर्फ अमेरिका तक सीमित था। लेकिन जैसे-जैसे ई-कॉमर्स फैला, यह सेल दुनिया के कई देशों तक पहुंच गई। अब ब्लैक फ्राइडे भारत, यूरोप, एशिया तक में सेल का प्रतीक बन चुकी है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की दुकानों में भारी ऑफर्स होते हैं, और लोग छुट्टियों के मौसम की शुरुआत इसी दिन से मान लेते हैं।

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ब्लैक फ्राइडे सेल क्या है (Photo: iStock)

Black Friday Sale History: आज ब्लैक फ्राइडे है। ब्लैक फ्राइडे दुनिया का सबसे बड़ा शॉपिंग फेस्टिवल है। दुकानों से लेकर ई कॉमर्स वेबसाइट्स पर, शॉपिंग के दीवानों का हुजूम नजर आता है। इतना ज्यादा डिस्काउंट मिल रहा होता है कि लोग बिना जरूरत के भी शॉपिंग करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये 'ब्लैक फ्राइडे' है क्या? क्यों इस खास फ्राइडे को ब्लैक फ्राइडे कहा जाता है।

ब्लैक फ्राइडे क्या है?

ब्लैक फ्राइडे सेल का जन्म अमेरिका में हुआ था। आज यह लगभग पूरी दुनिया में धमाल मचा रहा है। दरअसल हर साल नवंबर के आखिरी गुरुवार को अमेरिका में थैंक्स गिविंग डे मनाया जाता है। लोग इस दिन दूसरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इसके अगले दिन से अमेरिकन्स क्रिसमस की तैयारियों में जुट जाते हैं। क्रिसमस के लि गिफ्ट्स खरीदने और घर सजाने का सिलसिला शुरू हो जाता है।

वहां के लोकल दुकानदारों ने इसे भुना लिया। इसी दिन भारी डिस्काउंट दिया जाने लगा ताकि लोग जमकर खरीदारी करें। शुरू में ये छोटी-मोटी सेल थी, लेकिन धीरे-धीरे ये दुनिया का सबसे बड़ा शॉपिंग फेस्टिवल बन गया। आज ये सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। अब ब्लैक फ्राइडे सेल भारत, यूरोप, एशिया तक फैल चुकी है। शॉपिंग साइट्स पर ब्लैक फ्राइडे सेल का लोग सालभर इंतजार करते हैं। यहां हर चीज पर बंपर छूट मिलती है।

Black Friday

सेल का नाम कैसे पड़ा ब्लैक फ्राइडे (Photo: iStock)

'ब्लैक फ्राइडे' नाम कैसे पड़ा?

अब सवाल ये है कि मौका सेल और खुशी का है तो फिर इसका नाम ब्लैक फ्राइडे क्यों पड़ा। काला रंग तो नकारात्मकता का प्रतीक है। फिर ऐसा क्यों हुआ। इसकी असली वजह 1960 के दशक की है। अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर में थैंक्स गिविंग के अगले दिन जब लोग शॉपिंग करने निकले तो सड़कें जाम हो गईं, हर जगह पार्किंग के लिए मारामारी और दुकानों के बाहर लंबी-लंबी कतारें नजर आने लगीं। भीड़ को मैनेज करने में वहां के पुलिसकर्मियों के पसीने छूट गए। चारों तरफ अव्यवस्था को देखते हुए उन्होंने इसे 'ब्लैक फ्राइडे' नाम दे दिया।

1980-90 के आसपास अमेरिका के रिटेल व्यापारियों ने पुलिस के ब्लैक फ्राइडे को पॉजिटिव ट्विस्ट दे दिया। वहां के बही खाते में घाटे को लाल रंग और मुनाफे को काले रंग की स्याही से लिखा जाता था। थैंक्स गिविंग डे के अगले शुक्रवार को लोग इतनी शॉपिंग करते कि दुकानदारों के बही खाते काली स्याही से भरे नजर आते। व्यापारी लोगों को ये. बात बताते और लोग विश्वास भी करते। इस तरह से ब्लैक फ्राइडे का पूरा स्वरूप ही बदल गया

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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