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वतन पर शायरी: दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त.., देशप्रेम के एहसास को दोगुना कर देंगे ये जोशीले वतन से मोहब्बत शायरी 2 line

Watan par Shayari in Hindi: अपने वतन से मोहब्बत के एहसास को बहुत से मशहूर शायरों ने शब्दों से सजाया है। वतन पर ऐसी शायरियां लिखी हैं कि पढ़े वाले के दिल में अपनी मिट्टी के लिए प्यार दोगुना हो जाए।

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वतन पर शायरी

वतन पर शायरी हिंदी में (Patriotic Shayari in Hindi): अपनी सरजमीं से हर किसी को प्यार होता है। देश के वीर जवान अपने वतन के लिए हंसते-हंसते प्राणों की आहुति दे देते हैं। दरअसल किसी भी इंसान की पहचान उसके जाति या धर्म से नहीं बल्कि वतन से होती है। हम सब पहले हिंदुस्तानी हैं उसके बात कुछ और। अपने वतन से मोहब्बत के एहसास को बहुत से मशहूर शायरों ने शब्दों से सजाया है। वतन पर ऐसी शायरियां लिखी हैं कि पढ़े वाले के दिल में अपनी मिट्टी के लिए प्यार दोगुना हो जाए। यहां देखें वतन पर लिखे कुछ मशहूर शेर:

1. रौशनी बांटता हूं सरहदों के पार भी मैं

हम-वतन इस लिए ग़द्दार समझते हैं मुझे

- शाहिद ज़की

2. पहलू में मेरे दिल को न ऐ दर्द कर तलाश

मुद्दत हुई ग़रीब वतन से निकल गया

- अमीर मीनाई

3. दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो

निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो

- जाफ़र मलीहाबादी

4. ग़ुर्बत की ठंडी छांव में याद आई उस की धूप

क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बाद

- कैफ़ी आज़मी

5. हम ख़ून की क़िस्तें तो कई दे चुके लेकिन

ऐ ख़ाक-ए-वतन क़र्ज़ अदा क्यूं नहीं होता

- वाली आसी

6. कहां हैं आज वो शम-ए-वतन के परवाने

बने हैं आज हक़ीक़त उन्हीं के अफ़्साने

- सिराज लखनवी

7. दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

- लाल चन्द फ़लक

8. वतन की फ़िक्र कर नादां मुसीबत आने वाली है

तिरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में

- अल्लामा इक़बाल

9. लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है

उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी

- फ़िराक़ गोरखपुरी

10. मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा

- अल्लामा इक़बाल

11. वतन के जां-निसार हैं वतन के काम आएँगे

हम इस ज़मीं को एक रोज़ आसमाँ बनाएँगे

- जाफ़र मलीहाबादी

12. ज़बां हमारी न समझा यहाँ कोई 'मजरूह'

हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे

- मजरूह सुल्तानपुरी

13. वतन की ख़ाक से मर कर भी हम को उन्स बाक़ी है

मज़ा दामान-ए-मादर का है इस मिट्टी के दामन में

- चकबस्त बृज नारायण

14. वतन की रेत ज़रा एड़ियां रगड़ने दे

मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा

- मुज़फ़्फ़र वारसी

उम्मीद करते हैं कि इन शेरों ने आपके दिल में भी अपनी सरजमीं से मोहब्बत के एहसास को दोगुना किया होगा। इस साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप अपनों के साथ ये शायरियां साझा भी कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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