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महिलाओं में क्यों बढ़ रहे हैं PCOS और थायराइड केस, स्ट्रेस-जंक फूड या हार्मोनल अंसतुलन, क्या है असली वजह

शहरी महिलाओं में PCOS और थायराइड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। क्या इसकी वजह स्ट्रेस, जंक फूड, लाइफस्टाइल या हार्मोनल असंतुलन है? चलिए आज आपको बताते हैं इसके पीछे का मुख्य कारण क्या है।

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महिलाओं में पीसीओस जैसी समस्याओं की मुख्या वजह (PC - Istock)

आजकल अगर आप अपने आसपास देखें तो कई महिलाएं पीरियड्स की अनियमितता, अचानक वजन बढ़ना, बाल झड़ना या थकान जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। डॉक्टर के पास जाने पर अक्सर दो नाम सुनने को मिलते हैं – PCOS और थायराइड। खासकर शहरी महिलाओं में इन बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या इसकी वजह सिर्फ जंक फूड और भागदौड़ भरी जिंदगी है, या इसके पीछे कोई गहरा हार्मोनल असंतुलन छिपा है? हालिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार, इसका जवाब सिर्फ एक कारण में नहीं बल्कि कई जुड़े हुए फैक्टर्स में छिपा है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि असली वजह क्या है।

जीवनशैली का प्रभाव

शहरी जीवन की तेज रफ्तार ने महिलाओं की जीवनशैली को काफी प्रभावित किया है। लंबे काम के घंटे, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों की कमी हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ रही है।

तनाव का योगदान

यह शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाता है, महिलाओं के प्रजनन हार्मोनों और चयापचय स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है, बल्कि हार्मोनल असंतुलन को भी बढ़ाता है।

जंक फूड का प्रभाव

आजकल की फास्ट-फूड संस्कृति और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ा रहा है, जो PCOS का मुख्य कारण है। उच्च चीनी और अस्वस्थ वसा वाले खाद्य पदार्थ न केवल वजन बढ़ाते हैं, बल्कि हार्मोनल असंतुलन को भी बढ़ाते हैं।

थायराइड विकारों की बढ़ती संख्या

भारत में थायराइड विकार, विशेषकर हाइपोथायरायडिज्म, भी एक गंभीर चिंता का विषय है। अध्ययन बताते हैं कि हर 8 में से 1 युवा महिला इस समस्या से प्रभावित है। थायराइड विकारों का PCOS से गहरा संबंध है, जिससे यह समस्या और भी जटिल हो जाती है।

शहरी महिलाओं की विशेष संवेदनशीलता

शहरी महिलाओं को कई कारणों से इन समस्याओं का अधिक सामना करना पड़ता है। जैसे कि शारीरिक गतिविधियों की कमी, अधिक तनाव, और अस्वास्थ्यकर खान-पान। इसके अलावा, उच्च स्क्रीनिंग दरों के कारण अधिक मामलों का पता चल रहा है।

जागरूकता और समाधान

महिलाओं में हार्मोनल विकारों की बढ़ती संख्या एक चेतावनी है। इसके लिए जागरूकता, प्रारंभिक स्क्रीनिंग, और स्वस्थ जीवनशैली का पालन करना आवश्यक है।

इस समस्या का समाधान केवल दवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके मूल कारणों को समझना और उन पर ध्यान देना चाहिए।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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