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डॉलर के दबदबे पर चोट! BRICS में बोले पीयूष गोयल- लोकल करेंसी में हो व्यापार, UPI का बढ़े इस्तेमाल

आज BRICS दुनिया के एक बड़े आर्थिक समूह के रूप में उभरा है। इसमें 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जो करीब 49.5% वैश्विक आबादी, 40% वैश्विक GDP और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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पीयूष गोयल

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने BRICS देशों से आपस में अपनी भुगतान प्रणालियों को जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे देशों के बीच व्यापार आसान होगा और डिजिटल कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे साफ है कि BRICS में डॉलर पर निर्भरता घटाने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में मजबूत सिस्टम तैयार किया है और UPI इसका बड़ा उदाहरण है।

UPI की पहुंच 11 देशों तक

गोयल ने बताया कि भारत का UPI हर साल 250 अरब से ज्यादा लेनदेन कर रहा है। दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन की संख्या में UPI की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि UPI को अब 11 देशों में स्वीकार किया जाता है। ऐसे में BRICS देशों को अपनी-अपनी भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करना चाहिए। गोयल ने BRICS देशों से कहा कि वे एक-दूसरे के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाएं। इससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार में किसी एक विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर

गोयल ने कहा कि BRICS देशों के बीच व्यापार सिर्फ बढ़ना ही नहीं चाहिए, बल्कि उसकी सप्लाई चेन भी मजबूत होनी चाहिए। इसके लिए देशों को एक-दूसरे के बाजारों में अपने उत्पादों के लिए ज्यादा अवसर देने होंगे। उन्होंने कहा कि कच्चे माल और महत्वपूर्ण खनिजों समेत एक-दूसरे के उत्पादों के लिए बाजार खोलने की जरूरत है। मजबूत सप्लाई चेन तभी बन सकती है, जब व्यापार दोनों दिशाओं में हो।

गैर-टैरिफ बाधाएं भी कम हों

गोयल ने व्यापार में आने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी बाधाओं के कारण कारोबार की लागत बढ़ जाती है और यह लागत टैरिफ यानी शुल्क से होने वाली लागत से भी ज्यादा हो सकती है। उन्होंने BRICS देशों से नियमों और प्रक्रियाओं को आसान बनाने तथा सामान की खेप को जल्द मंजूरी देने में सहयोग करने की अपील की।

कृषि से लेकर ऑटो तक सहयोग

गोयल ने कहा कि BRICS देशों के बीच कई क्षेत्रों में कारोबार और सहयोग बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं। इनमें कृषि, दवा, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, ऑटो पार्ट्स और सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने कृषि-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को बढ़ावा देने की भी बात कही, ताकि BRICS देशों के किसानों के लिए खाद्य सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का मिलकर समाधान निकाला जा सके।

मंत्री ने सेवाओं के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेशेवरों को एक-दूसरे के देशों में आसानी से आने-जाने की सुविधा मिलनी चाहिए और उनकी पेशेवर योग्यताओं को मान्यता देने की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए।

रूस बना उदाहरण

फोरम में रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने भी स्थानीय मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले रूसी निर्यात के भुगतान में डॉलर और यूरो की संयुक्त हिस्सेदारी 85% थी। अब यह घटकर करीब 11% रह गई है। रेशेतनिकोव ने कहा कि रूस के लिए एक वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था महत्वपूर्ण बन गई है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था कई देशों के हजारों बैंकों को जोड़ती है।

BRICS ग्रेन एक्सचेंज का प्रस्ताव

रूस ने BRICS देशों के सामने ‘BRICS ग्रेन एक्सचेंज’ बनाने का प्रस्ताव भी रखा। इसका उद्देश्य कृषि जिंसों के कारोबार के लिए एक ऐसा साझा मंच तैयार करना है, जहां उत्पादक, कारोबारी और खरीदार सीधे लेनदेन कर सकें।

रेशेतनिकोव ने कहा कि BRICS देश दुनिया के प्रमुख कृषि उत्पादकों और उपभोक्ताओं में शामिल हैं। इसलिए रणनीतिक कृषि जिंसों के लिए अपने स्वतंत्र कारोबारी तंत्र विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने BRICS विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) संघ और BRICS बिजनेस नेविगेटर पर भी मिलकर काम करने का सुझाव दिया।

वैश्विक व्यापार वित्त की कमी बड़ी चुनौती

भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने वैश्विक व्यापार वित्त की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में व्यापार वित्त की अनुमानित कमी करीब 2.5 लाख करोड़ डॉलर है। उन्होंने कहा कि खासकर निर्यातकों को उनके पक्के ऑर्डर और भरोसेमंद भुगतान रिकॉर्ड के आधार पर आसानी से और कम लागत पर वर्किंग कैपिटल मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जयपुर सहमति इस दिशा में BRICS के साझा तंत्र को आगे बढ़ाने का आधार बन सकती है। अगस्त 2026 में जयपुर में हुई BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक में इस सहमति को अपनाया गया था। इसमें खास तौर पर MSME के लिए व्यापार वित्त की बाधाओं को कम करने पर जोर दिया गया।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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