Tulsidas Ke Motivational Dohe (तुलसीदास के दोहे): महाकवि और भक्त कवि गोस्वामी तुलसीदास की आज जयंती है। हर साल सावन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को तुलसीदास मनाई जाती है। 16वीं सदी के भक्ति आंदोलन के प्रतीक माने जाने वाले तुलसीदास ने रामचरितमानस जैसी अमर कृति रचकर हिंदी साहित्य और भक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। दोहे हो या फिर चौपाई, तुलसीदास की रचनाएं आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। तुलसीदास ने अपने ग्रंथों में कई ऐसे दोहे लिखे हैं जो हमें जीने का सही मतलब और तरीका बताते हैं। आइए डालते हैं संत तुलसीदास के ऐसे ही कुछ प्रेरक दोहों पर एक नजर:
Tulsidas Motivational Quotes in Hindi | तुलसीदास के अनमोल विचार | तुलसीदास के प्रेरक दोहे
1. दया धर्म का मूल है पाप मूल अभिमान।
तुलसी दया न छांड़िए, जब लग घट में प्राण।।
भावार्थ - मनुष्य को दया कभी नहीं छोड़नी चाहिए। दया ही हर धर्म का मूल है। वहीं सभी पाप के मूल में अभिमान होता है। अगर अभिमान मनुष्य के अंदर आ जाए तो विवेक समाप्त हो जाता है और वह गलत मार्ग पर चला जाता है।
2. आगें कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई।
जाकर चित अहि गति सम भाई। अस कुमित्र परिहरेहिं भलाई।
भावार्थ - जो मित्र आपके सामने कोमल वचन बोले लेकिन मन में उसके द्वेष की भावना हो तो ऐसे दोस्त का तुरंत त्याग कर दें। ऐसे कुमित्र सफलता के मार्ग में रोड़ा बनते हैं।
3. काम क्रोध मद लोभ की, जौ लौं मन में खान।
तौ लौं पण्डित मूरखौं, तुलसी एक समान।।
भावार्थ - जब किसी व्यक्ति पर काम यानी कामेच्छा, क्रोध, अहंकार और लालच हावी हो जाता है तो एक पढ़ा-लिखा और समझदार व्यक्ति भी अनपढ़ के तरह व्यवहार करने लगता है। इसलिए मनुष्य को इन सभी अवगुणों से बहुत दूर रहना चाहिए।
4. तुलसी जे कीरति चहहिं, पर की कीरति खोइ।
तिनके मुंह मसि लागहैं, मिटिहि न मरिहै धोइ।।
भावार्थ - जो दूसरों की बुराई कर खुद सम्मान पाना चाहते हैं, ऐसे लोग बहुत जल्द अपनी मान-प्रतिष्ठा खो देते हैं। इनके मुंह पर ऐसी कालिख पुत जाती है जो कभी नहीं मिटती।
5. राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर।
भावार्थ - खुशहाल जीवन के लिए व्यक्ति को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। अपशब्द बोलने की बजाय राम का नाम जपे। इससे गुस्सा भी शांत होगा और रिश्तों में खटास भी नहीं आएगी।
6. आवत ही हरषै नहीं नैनं नहीं सनेह।
तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह।।
भावार्थ - जिस जगह आपके जाने से लोग प्रसन्न नहीं होते हों, अर्थात लोगों के अंदर आपके लिए प्रेम या स्नेह ना हो, वहां कभी भी नहीं जाना चाहिए। फिर चाहे वहां धन की ही बारिश क्यों न हो रही हो।
7. तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक ।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसे एक।
भावार्थ - विपरित हालातों में घबराएं नहीं। मुश्किल परिस्थिति में डर की बजाय बुद्धि का सही उपयोग करें। विवेक से काम लें। मुसीबत में साहस और अच्छे कर्म ही व्यक्ति को सफलता दिलाते हैं। ईश्वर पर सच्चा विश्वास रखें।
8. तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।
सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।
भावार्थ - सुंदरता देखकर न सिर्फ मूर्ख बल्कि चालाक इंसान भी धोखा खा जाता है। मोर दिखने में बहुत सुंदर लगते हैं लेकिन उनका भोजन सांप है। इसलिए सुंदरता के आधार पर कभी व्यक्ति पर भरोसा न करें।
9. तुलसी मीठे वचन ते, सुख उपजत चहुं ओर।
बसीकरन इक मंत्र है, परिहरु वचन कठोर।।
भावार्थ - मीठे और सौम्य शब्द हर ओर सुख फैलाते हैं। मीठा बोलना ऐसा मंत्र है जो सभी को वश में करता है, इसलिए कठोर शब्दों से बचना चाहिए।
10. जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरति देखी तिन तैसी।
भावार्थ - तुलसीदास कहते हैं कि जिसकी जैसी भावना होती है उसे भगवान का स्वरूप वैसा ही दिखता है। मतलब कि हमारी सोच और विश्वास हमारे जीवन के अनुभवों को आकार देते हैं।
तुलसीदास के ये दोहे जीवन में परिश्रम, विश्वास और सकारात्मक सोच का महत्व बताते हैं। उनकी रचनाएं आज भी हमें प्रेरित करती हैं कि सच्चाई और प्रेम के मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।
