Thought of the day: एक अच्छा विचार आपकी पूरी की पूरी सोच को बदलने का काम कर सकता है। जब आपको ऐसा लगे की सारे रास्ते बंद हो गए हैं और चारों तरफ सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा है तो एक पॉजिटिव विचार आपको नई दिशा में ले जाने का काम कर सकता है। आज का सुविचार हमें बताता है कि ठोकरें अपना काम कर देती हैं, अब संभलना या नहीं संभलना हमारी सोच और कोशिश पर निर्भर करता है। इसी कड़ी में हमारा आज का सुविचार है:
'ठोकरे खाकर भी ना संभले तो मुसाफिर का नसीब, वरना पत्थरों ने तो अपना फर्ज निभा ही दिया था।'
यह सुविचार हमें सीखाता है कि जिंदगी में आने वाली परेशानियां, असफलताएं और मुश्किलें हमें तोड़ने नहीं बल्कि मजबूत बनाने आती हैं। लेकिन कई बार इंसान उन्हीं गलतियों को बार-बार दोहराता रहता है और सीख नहीं लेता जिससे वह मुश्किल में पड़ जाता है।
जिंदगी की ठोकरें हमें कुछ सिखाने आती हैं
हर इंसान की जिंदगी में कभी न कभी मुश्किल समय आता है। मुश्किलों से घबराने या फिर एक गलती को बार-बार दोहराने की बजाए हमें उनसे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। जैसे रास्ते में पड़ा पत्थर मुसाफिर को ठोकर देता है, वैसे ही जिंदगी की परेशानियां हमें रुककर सोचने का मौका देती हैं। बस हमें ध्यान ये रखना है कि एक गलती को बार-बार दोहराया ना जाए उनसे सीख ली जाए और आगे बढ़ा जाए।
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मुश्किल समय इंसान की ताकत पहचानता है
जैसे- सोना आग में तपकर और निखरता है, उसी तरह इंसान भी संघर्षों से गुजरकर ज्यादा समझदार बनता है। अक्सर हम सोचते हैं कि परेशानी हमारे खिलाफ है, लेकिन कई बार वही परेशानी हमें अंदर से मजबूत बनाने के लिए आई होती है। ऐसे समय में जो व्यक्ति धैर्य रखकर आगे बढ़ता है जीवन में बड़ी सफलता उसे ही मिलती है।
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असली मुसाफिर वही है जो सीखकर आगे बढ़े
इस विचार का सार यही है कि जिंदगी हमें मौके देती रहती है। ठोकरें अपना काम कर देती हैं, अब संभलना या नहीं संभलना हमारी सोच और कोशिश पर निर्भर करता है। इसलिए मुश्किलों से डरने के बजाय उनसे सीखना चाहिए, क्योंकि कई बार वही ठोकरें हमें उस मंजिल तक पहुंचाती हैं जहां हम पहुंचना चाहते हैं।
