Suraj Par Shayari (सूरज पर शायरी 2 लाइन): भारतीय संस्कृति में सूर्य को देवता का दर्जा दिया गया है, जो ज्ञान, शक्ति और सत्य के प्रतीक हैं। सूर्य हमें हर दिन एक नया आरंभ करने की प्रेरणा देता है। जब सूरज उगता है तो मानो वह कहता है कि अंधेरा चाहे जितना गहरा हो, रोशनी लौटकर जरूर आती है। दुनिया में ऊर्जा के सबसे बड़े स्रोत सूर्य पर बहुत कुछ लिखा और कहा गया है। बहुत से शायरों ने भी सूरज पर कई बेहतरीन शेर लिखे हैं। तो आइए छठ पूजा के इस माहौल में पढ़ते हैं सूरज पर लिखे चंद मशहूर शेर:
1. सूरज हूं ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊंगा
मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाऊंगा
- इक़बाल साजिद
2. सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का
यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का
- शहरयार
3. ऊंची इमारतों से मकां मेरा घिर गया
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए
- जावेद अख़्तर
4. वो रातें चांद के साथ गईं वो बातें चांद के साथ गईं
अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो
- इब्न-ए-इंशा
5. सूरज सितारे चांद मिरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे
- राहत इंदौरी
6. ये तो इक रस्म-ए-जहां है जो अदा होती है
वर्ना सूरज की कहां सालगिरह होती है
- अज्ञात
7. एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा
आंख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा
- परवीन शाकिर
8. मैं इस लिए हुजूम का हिस्सा नहीं बना
सूरज कभी नुजूम का हिस्सा नहीं बना
- शाहिद माकुली
9. तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़
लोग क्या सादा हैं सूरज को दिखाते हैं चराग़
- अहमद फ़राज़
10. उदासी शाम तन्हाई कसक यादों की बेचैनी
मुझे सब सौंप कर सूरज उतर जाता है पानी में
- अलीना इतरत
11. मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर
बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है
- शहरयार
उम्मीद करते हैं कि सूरज पर लिखे ये शेर आपको जरूर पसंद आए होंगे। आप चाहें तो सूरज पर लिखे ये शेर अपने दोस्तों और करीबियों के साथ भी शेयर कर सकते हैं।
