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Strawberry Moon Today: क्या आज पूनम की रात आसमान में दिखेगा 'प्यार का चांद', क्यों लोग कर रहे गुलाबी रंगत वाले स्ट्रॉबेरी मून का इंतजार

Strawberry Moon Today: जानें स्ट्रॉबेरी मून क्या है, इसका नाम कैसे पड़ा। क्या सच में जून महीने की पूर्णिमा पर आज चांद गुलाबी दिखेगा। क्यों इस ाचांद का संबंध प्यार से माना जाता है। समझें वट पूर्णिमा के साथ इसका खास भारतीय कनेक्शन।

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स्ट्रॉबेरी मून क्या है, क्यों इसे प्यार से जोड़ा जाता है

Strawberry Moon Today: रात के आसमान में चमकता पूरा चांद हमेशा से लोगों को आकर्षित करता आया है। लेकिन साल में एक बार ऐसा भी मौका आता है, जब इसी पूर्णिमा को एक खास नाम दिया जाता है स्ट्रॉबेरी मून (Strawberry Moon)। नाम सुनते ही सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या आज रात का चांद सचमुच स्ट्रॉबेरी की तरह गुलाबी दिखाई देगा? वहीं सोशल मीडिया पर इसे 'प्यार का चांद' भी कहा जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि इस बार स्ट्रॉबेरी मून ऐसे दिन दिखाई दे रहा है, जब भारत में वट पूर्णिमा व्रत भी मनाया जा रहा है। एक तरफ यह खगोलीय घटना है, तो दूसरी तरफ प्रेम और वैवाहिक समर्पण से जुड़ा भारतीय पर्व। ऐसे में लोगों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है। लेकिन क्या सच में स्ट्रॉबेरी मून का प्यार से कोई संबंध है? और क्या आज रात चांद गुलाबी दिखाई देगा - आइए जानते हैं।

स्ट्रॉबेरी मून क्या है

सबसे पहले एक बात साफ कर लें। स्ट्रॉबेरी मून 2026 कोई अलग तरह का चांद नहीं है। यह बस जून महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा का नाम है। यानी हर साल जून का Full Moon ही स्ट्रॉबेरी मून कहलाता है। इस दिन चांद का आकार सामान्य पूर्णिमा जैसा ही होता है। कई बार यह थोड़ा बड़ा या ज्यादा चमकीला महसूस हो सकता है, लेकिन इसकी वजह चांद नहीं, बल्कि उसे देखने का हमारा नजरिया होता है।

और हां, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि चांद स्ट्रॉबेरी की तरह गुलाबी होगा।

स्ट्रॉबेरी मून नाम की दिलचस्प कहानी

स्ट्रॉबेरी मून नाम की कहानी सैकड़ों साल पुरानी है। उत्तरी अमेरिका की मूल जनजातियां जून के महीने में जंगली स्ट्रॉबेरी तोड़ा करती थीं। उनके लिए यह फसल का मौसम होता था। इसलिए उन्होंने जून के पूर्णिमा वाले चांद को Strawberry Moon कहना शुरू कर दिया।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसी जून के पूर्णिमा चंद्रमा के अलग-अलग नाम हैं। कहीं इसे Honey Moon कहा जाता है तो कहीं Rose Moon। यानी नाम मौसम और स्थानीय परंपराओं के हिसाब से बदलते रहे, लेकिन चांद वही रहा।

प्यार से क्यों जोड़ा जाता है स्ट्रॉबेरी मून

अगर आपने सोशल मीडिया पर प्यार और स्ट्रॉबेरी मून के बारे में पोस्ट देखी हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। दरअसल, पूर्णिमा की रात को लंबे समय से प्रेम, भावनाओं और खूबसूरत यादों का प्रतीक माना जाता रहा है। चांदनी रात में साथ टहलना, किसी को प्रपोज करना या अपने साथी के साथ समय बिताना कई संस्कृतियों में रोमांटिक माना जाता है।

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इस रात रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इसलिए कई कपल इस दिन डेट प्लान करते हैं या अपने रिश्ते की नई शुरुआत करते हैं।

हालांकि यहां एक बात याद रखना जरूरी है। इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। ये सिर्फ सांस्कृतिक परंपराएं और लोकविश्वास हैं। इन्हें उसी नजरिए से देखना चाहिए।

भारत में क्यों खास है यह पूर्णिमा

भारत के लिए इस बार की पूर्णिमा एक और वजह से खास है। आज वट पूर्णिमा व्रत भी मनाया जा रहा है। हिंदू परंपरा में यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और लंबे वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है।

इस व्रत की कथा सावित्री और सत्यवान से जुड़ी है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, बुद्धिमत्ता और प्रेम के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से विवाहित महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।

यही वजह है कि जब वट पूर्णिमा और स्ट्रॉबेरी मून एक ही दिन आते हैं, तो कई लोग इसे प्रेम और समर्पण का खूबसूरत संयोग मानते हैं। हालांकि यह पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता है। इसका खगोलीय घटना से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है।

विज्ञान की नजर में स्ट्रॉबेरी मून

अब बात विज्ञान की। वैज्ञानिकों के मुताबिक Strawberry Moon सिर्फ जून का Full Moon है। इसका रंग स्ट्रॉबेरी जैसा नहीं होता।

फिर कई बार चांद लाल या नारंगी क्यों दिखता है

दरसअलअजब चांद क्षितिज के पास होता है, तब उसकी रोशनी पृथ्वी के वातावरण की लंबी परतों से होकर गुजरती है। इस दौरान नीली रोशनी ज्यादा बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी रंग हमारी आंखों तक अधिक पहुंचते हैं। इसलिए आज रात का चांद हल्का सुनहरा, नारंगी या लालिमा लिए दिखाई दे सकता है।

यानी रंग बदलता हुआ दिखता है, लेकिन चांद नहीं बदलता।

ज्योतिष और मान्यताएं

ज्योतिष में पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। कई लोग इस दिन ध्यान करते हैं, चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं या अपने जीवन के लिए सकारात्मक संकल्प लेते हैं। ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा की रात आत्मचिंतन, भावनात्मक संतुलन और कृतज्ञता व्यक्त करने का अच्छा मौका हो सकती है।

हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि खगोल विज्ञान और ज्योतिष अलग-अलग विषय हैं। खगोल विज्ञान चंद्रमा की वास्तविक स्थिति को समझाता है, जबकि ज्योतिष पारंपरिक मान्यताओं और विश्वासों पर आधारित होता है।

स्ट्रॉबेरी मून देखने के आसान टिप्स

अगर आप आज रात स्ट्रॉबेरी मून देखना चाहते हैं, तो ऐसी जगह जाएं जहां आसमान खुला हो। शहर की तेज रोशनी से थोड़ा दूर रहें। इससे चांद ज्यादा साफ दिखाई देगा।

दूरबीन हो तो अच्छा है, लेकिन उसकी जरूरत नहीं है। खुली आंखों से भी यह नजारा बेहद खूबसूरत लगता है।

अगर मोबाइल से तस्वीर लेना चाहते हैं, तो नाइट मोड का इस्तेमाल करें। कैमरे को किसी स्थिर जगह पर रखें और ज्यादा डिजिटल जूम न करें। इससे बेहतर तस्वीर मिलेगी।

स्ट्रॉबेरी मून पर हमारा पक्ष

स्ट्रॉबेरी मून हमें यह याद दिलाता है कि एक ही चांद को दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियां अपने-अपने नजरिए से देखती हैं। विज्ञान इसे जून का Full Moon कहता है। वहीं लोककथाएं और परंपराएं इसे प्रेम, नई शुरुआत और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानती हैं।

भारत में आज वट पूर्णिमा का पर्व इस संयोग को और भी खास बना देता है। एक तरफ आसमान में चमकता पूर्णिमा का चांद है, तो दूसरी ओर सावित्री-सत्यवान की अमर प्रेम कथा की याद। विज्ञान और संस्कृति भले ही अलग-अलग बातें कहें, लेकिन दोनों मिलकर इस रात को यादगार जरूर बना देते हैं।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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