Smoking Health Risks And Effects On Body: आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने यह न सुना हो कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी लिखी होती है, टीवी पर विज्ञापन आते हैं, डॉक्टर भी मना करते हैं। फिर भी तंबाकू दुनिया भर में समय से पहले होने वाली मौतों के सबसे बड़े कारणों में शामिल है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि धूम्रपान सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि एक ऐसी लत है जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करती जाती है। दिल की बीमारी, कैंसर, फेफड़ों की समस्या और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि अब कई देशों में 'तंबाकू-मुक्त पीढ़ी' बनाने पर चर्चा हो रही है।
लोग अक्सर समझ नहीं पाते धूम्रपान का खतरा कितना बड़ा है
ज्यादातर लोग जानते हैं कि स्मोकिंग नुकसान (Smoking Side Effects) करती है, लेकिन इसका असली असर कितना गंभीर होता है, यह अक्सर नजरअंदाज हो जाता है। रिसर्च बताती है कि अमेरिका में हर साल धूम्रपान से होने वाली मौतें शराब, ड्रग्स, सड़क दुर्घटनाओं, आत्महत्या और हत्या से होने वाली कुल मौतों से भी ज्यादा होती हैं। इसका मतलब साफ है - तंबाकू सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह एक बड़ा पब्लिक हेल्थ संकट है।
इलाज पर होता भारी खर्च
सिगरेट से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर हर साल करीब 240 अरब डॉलर खर्च होते हैं। यह बोझ सिर्फ धूम्रपान करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार, हेल्थ सिस्टम और देश की अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है। यानी तंबाकू का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और संसाधनों पर भी पड़ता है।
पिछले 50 साल में कम हुए स्मोकर्स
राहत की बात यह है कि पिछले कुछ दशकों में धूम्रपान करने वालों की संख्या में गिरावट आई है। 1944 में अमेरिका में करीब 41% लोग स्मोकिंग करते थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा घटकर लगभग 11% रह गया। इसके बावजूद आज भी 2.5 करोड़ से ज्यादा लोग धूम्रपान करते हैं। इस बदलाव के पीछे कई सख्त नियम और जागरूकता अभियान जिम्मेदार रहे हैं, जैसे:
- टीवी और रेडियो पर सिगरेट के विज्ञापनों पर प्रतिबंध (1971)
- कमर्शियल फ्लाइट्स में धूम्रपान पर रोक (2000)
- फ्लेवर वाली सिगरेट की बिक्री पर रोक (2009)
- कम उम्र के लोगों को सिगरेट बेचने पर सख्ती (2019)
क्या है ‘तंबाकू-मुक्त पीढ़ी’ का विचार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने 2010 में ‘तंबाकू-मुक्त पीढ़ी’ का कॉन्सेप्ट दिया। इसका मकसद है कि एक तय साल के बाद जन्मे लोगों को तंबाकू बेचना पूरी तरह गैरकानूनी कर दिया जाए। 2021 में अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य के ब्रुकलाइन शहर ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया। यहां 1 जनवरी 2000 या उसके बाद जन्मे लोगों को तंबाकू या वेप बेचना प्रतिबंधित कर दिया गया। 2025 में मालदीव ने भी देशभर में ऐसा नियम लागू किया। वहीं कुछ देशों में अभी इस तरह के कानून पर चर्चा जारी है।
एक सिगरेट 20 मिनट कम जिंदगी
रिसर्च के अनुसार, एक सिगरेट पीने से जीवन के करीब 20 मिनट कम हो सकते हैं। पहली नजर में यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन रोजाना सिगरेट पीने वालों के लिए यह नुकसान बहुत बड़ा बन जाता है। हर साल करीब 4.8 लाख लोगों की मौत सिर्फ धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। दिल की बीमारी, फेफड़ों का कैंसर और सांस की समस्याएं इसके बड़े उदाहरण हैं।
युवाओं को सबसे ज्यादा टारगेट करता है तंबाकू उद्योग
अध्ययनों में पाया गया है कि किशोर अक्सर धूम्रपान के नुकसान को पूरी तरह समझ नहीं पाते। इसी वजह से तंबाकू कंपनियां युवाओं को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाती हैं, ताकि वे कम उम्र में ही इस लत के शिकार बन जाएं। एक बार लत लग जाने के बाद इसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है, इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि शुरुआत में ही जागरूकता जरूरी है।
कानून के साथ जागरूकता भी जरूरी
सिर्फ नियम बनाना काफी नहीं होता। कई जगह उम्र सीमा तय होने के बावजूद युवा किसी न किसी तरीके से सिगरेट हासिल कर लेते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स जागरूकता पर ज्यादा जोर देते हैं। जब लोग खुद समझते हैं कि तंबाकू कितना नुकसान करता है, तभी वे इससे दूरी बनाने का फैसला लेते हैं।
निष्कर्ष
तंबाकू एक ऐसी लत है जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है और कई गंभीर बीमारियों का कारण बनती है। अच्छी बात यह है कि अब दुनियाभर में लोग इसके खतरे को समझ रहे हैं और धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अगर मजबूत नीतियां, सही जानकारी और जागरूकता साथ आएं, तो आने वाले समय में तंबाकू से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
(यह लेख स्वास्थ्य शोधकर्ता Mary Helweg-Larsen, Dickinson College द्वारा लिखे विश्लेषण और The Conversation में प्रकाशित जानकारी पर आधारित है।)
(Source: भाषा)
