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Shayari of the Day: जब यादें ही बन जाएं सहारा, आज की शायरी में पढ़ें इमाम बख्श नासिख का मशहूर शेर

Shayari of the Day: आज की शायरी में पढ़ते हैं इमाम बख्श नासिख का मशहूर शेर। इस शेर में इश्क की गहराई और महबूब की अनोखी पहचान को बेहद नाजुक अंदाज में बयान किया गया है।

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आज की शायरी

Shayari of the Day, Imam Baksh Nasikh Shayari:इमाम बख्श नासिख उर्दू शायरी के उन महत्वपूर्ण नामों में शामिल हैं, जिन्होंने भाषा की खूबसूरती और अभिव्यक्ति की नजाकत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका जन्म 18वीं सदी के अंत में हुआ और वे लखनऊ की मशहूर अदबी परंपरा से जुड़े रहे, जिसे उर्दू शायरी का स्वर्णकाल माना जाता है। नासिख अपनी सादगी भरी लेकिन असरदार शायरी के लिए जाने जाते हैं। उनकी ग़जलों में प्रेम, विरह, मानवीय भावनाएं और जीवन की सच्चाइयां बेहद सहज और दिल को छू लेने वाले अंदाज़ में मिलती हैं। वे शब्दों के चयन और भाषा की शुद्धता को लेकर बहुत सजग रहते थे, यही कारण है कि उनकी शायरी में एक खास नफासत दिखाई देती है।

आज की शायरी में पढ़ते हैं इमाम बख्श नासिख का एक बहुत ही मशहूर शेर और समझने की कोशिश करते हैं कि इस खूबसूरत से शेर का क्या मतलब है। तो शेर कुछ यूं है:

"तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत, हम जहां में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं"

इमाम बख्श नासिख के इस शेर में इश्क की गहराई और महबूब की अनोखी पहचान को बेहद नाजुक अंदाज में बयान किया गया है।

शेर का पहला मिसरा है - तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत, जो बताता है कि आशिक की नजर में उसका महबूब बिल्कुल बेमिसाल है। दुनिया में लाखों चेहरे हैं, लेकिन कोई भी उस प्रिय की सूरत जैसा नहीं। यहां महबूब की खूबसूरती महज उसकी सुंदरता नहीं, बल्कि उसकी शख्सियत, अदाएं और एहसास भी उसे सबसे अलग बनाते हैं।

वहीं शेर का दूसरा मिसरा कहता है कि हम जहां में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं। यह इश्क की उस हालत को बयां करता है, जहां आशिक हर जगह अपने महबूब को महसूस करता है। इसका मतलब यह नहीं कि वह सच में तस्वीर लिए घूम रहा है, बल्कि उसके दिल और ख्यालों में महबूब की छवि हर पल बसी हुई है। वह जहां भी जाता है, उसे हर चीज में उसी का अक्स दिखाई देता है।

इस शेर के असली मायने ये हैं कि सच्चा प्रेम इंसान की सोच और नजर को बदल देता है। आशिक के लिए उसका महबूब पूरी दुनिया बन जाता है। वह भीड़ में भी अकेला नहीं होता, क्योंकि उसके साथ हमेशा अपने प्यार की याद और एहसास रहती है।

कुल मिलाकर, यह शेर इश्क की उस खूबसूरत अवस्था को दर्शाता है, जहां महबूब की यादें ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा बन जाती है।

इमाम बख्श नासिख की शायरी

इमाम बख्श नासिख ने ऐसे ही कई दिल में उतर जाने वाले शेर लिखे हैं। आइए नजर डालते हैं उनकी कुछ मशहूर शायरी पर:

- ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम

मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं

- जुस्तुजू करनी हर इक अम्र में नादानी है

जो कि पेशानी पे लिक्खी है वो पेश आनी है

- ख़ुद ग़लत है जो कहे होती है तक़दीर ग़लत

कहीं क़िस्मत की भी हो सकती है तहरीर ग़लत

- रश्क से नाम नहीं लेते कि सुन ले न कोई

दिल ही दिल में उसे हम याद किया करते हैं

- ज़ुल्फ़ों में किया क़ैद न अबरू से किया क़त्ल

तू ने तो कोई बात न मानी मिरे दिल की

आज भी इमाम बख्श नासिख के शेर अदबी महफिलों में बड़े शौक से पढ़े जाते हैं। उनकी शायरी सादगी, गहराई और एहसास का ऐसा संगम है, जो हर दौर के पाठकों को अपनी ओर खींचती है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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