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Sharda Sinha : छठ गीतों का पर्याय थीं शारदा सिन्हा, Chhath Puja के दिन ही छोड़ दी दुनिया, रुला देगा उनका ये आखिरी छठ गीत

Sharda Sinha Death: छठ महापर्व को अपनी मधुर आवाज से सजाने वालीं शारदा सिन्हा का निधन मंगलवार रात 9 बजकर 20 मिनट पर हुआ। शारदा सिन्हा ने इस साल अस्वस्थ होने के कारण अपने छठ गीत (Sharda Sinha new Chhath Song) का वीडियो एम्स से रिलीज किया गया। इस वीडियो में बीमार हालत में शारदा सिन्हा ने अपने जीवन का आखिरी छठ गीत (Sharda Sinha Last Chhath Geet) गाया।

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Sharda Sinha Last Chhath Geet

Sharda Sinha Death News: अपनी मधुर आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वालीं मशहूर लोकगायिका शारदा सिन्हा का मंगलवार रात निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थीं। शारदा सिन्हा ने दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली। एम्स में बीते सोमवार से वह वेंटिलेटर पर चली गई थीं। उनके बेटे अंशुमन सिन्हा ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि 'आप सब की प्रार्थना और प्यार हमेशा मां के साथ रहेंगे। मां को छठी मईया ने अपने पास बुला लिया है। मां अब शारीरिक रूप में हम सब के बीच नहीं रहीं।' शारदा सिन्हा ने यूं तो सैकड़ों लोकगीतों और फिल्मी गानों को अपनी आवाज दी है, लेकिन उनके गाए छठ गीत बेहद लोकप्रिय हुए। यूं कहा जाए कि बिना शारदा सिन्हा के गीतों के छठ पूजा पूरी ही नहीं होती तो ये कहीं से भी गलत ना होगा। यूपी बिहार हो या फिर मुंबई, जहां कहीं भी छठ का त्योहार मनता है वहां शारदा सिन्हा के छठ गीत जरूर सुनाई पड़ते हैं।

शारदा सिन्हा का आखिरी छठ गीत (Sharda Sinha Last Chhath Song )

शारदा सिन्हा ने करीब 6 दर्जन छठ गीतों को अपनी आवाज दी है। वह हर साल छठ के मौके पर कोई ना कोई गीत जरूर रिलीज करती थीं। इस साल अस्वस्थ होने के कारण उनके छठ गीत का वीडियो एम्स से रिलीज किया गया। यह वीडियो उनका आखिरी म्युजिक वीडियो हो गया। इस वीडियो में बीमार हालत में शारदा सिन्हा ने अपने जीवन का आखिरी छठ गीत गाया। इस गीत के बोल हैं - दुखवा मिटाई ना हे छठी मैया।

किसे पता था कि छठ गीतों का पर्याय बन चुकीं शारदा सिन्हा छठ के दिन ही इस दुनिया को अलविदा कहेंगी। भले ही शारदा सिन्हा ने आज इस मृत्युलोक को छोड़ा हो, लेकिन छठ के गीतों में वह हमेशा के लिए अमर हो चुकी हैं। आइए देखें उनके गाए छठ के कुछ मशहूर गीत के बोल:

कांच ही बांस के बहंगिया (kanch hi bans ke bahangiya lyrics)

कांच ही बांस के बहंगिया, कांच ही बांस के बहंगिया,

बहंगी लचकत जाए, बहंगी लचकत जाए ।।

होए ना बलम जी कहरिया , बहंगी घाटे पहुंचाए,

बहंगी घाटे पहुंचाए ।

कांच ही बांस के बहंगिया , बहंगी लचकत जाए,

बहंगी लचकत जाए ।।

बाट जे पूछे ना बटोहिया , बहंगी केकरा के जाय,

बहंगी केकरा के जाय ।

तू तो आंध्र होवे रे बटोहिया , बहंगी छठ मैया के जाए,

बहंगी छठ मैया के जाए ।

वह रे जे बाड़ी छठी मैया, बहंगी उनका के जाए,

बहंगी उनका के जाए।

कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए,

बहंगी लचकत जाए ।।

होए ना देवर जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाई,

बहंगी घाटे पहुंचाई ।।

वह रे जो बाड़ी छठी मैया बहंगी उनका के जाए,

बहंगी उनका के जाए ।।

बाटे जे पूछे ना बटोहिया बहंगी केकरा के जाय,

बहंगी केकरा के जाय ।।

तू तो आन्हर होय रे बटोहिया बहंगी छठ मैया के जाए,

बहंगी छठ मैया के जाए ।।

वह रे जय भइली छठी मैया , बहंगी उनका के जाए,

बहंगी उनका के जाए ।।

पहिले पहिल हम कईनी छठ गीत लिरिक्स (pahile pahil hum kaini lyrics)

पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहर,

छठी मईया व्रत तोहर।

करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार,

भूल-चूक गलती हमार।

गोदी के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार,

छठी मईया ममता-दुलार।

पिया के सनईहा बनईहा, मैया दिहा सुख सार,

मैया दिहा सुख सार।

नारियल केरवा घवदवा, साजल नदिया किनार,

साजल नदिया किनार।

सुनिहा अरज छठी मैया, बढ़े कुल परिवार,

बढ़े कुल परिवार।

घाट सजवली मनोहर, मैया तोरा भगती अपार,

मैया तोरा भगती अपार।

लिहि ए अरग हे मैया, दिहीं आशीष हजार,

दिहीं आशीष हजार।

पहिले पहिल हम कईनी, छठीमैया बरत तोहर,

छठीमैया व्रत तोहर।

करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार

भूल-चूक गलती हमार, भूल-चूक गलती हमार।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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