Savitribai Phule Death Anniversary quotes: सावित्रीबाई फुले देश की पहली महिला शिक्षक थी। इनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित नयागांव के एक दलित परिवार में हुआ था। 18वीं सदी में जब महिलाओं का स्कूल जाना पाप समझा जाता था, तब इन्होंने महिलाओं के लिए देश में पहला स्कूल खोलकर इनको शिक्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया। सावित्रीबाई ने ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर अपने 18वें जन्मदिन पर 3 जनवरी 1848 को पुणे में बालिकाओं के लिए पहले स्कूल की स्थापना की। इसमें विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं को दाखिला मिला। शिक्षा को लेकर उनके विचार ऐसे हैं कि आप आदमी की जिंदगी बदल सकते हैं।
Savitribai Phule quotes:
अज्ञानता को तुम धर दबोचो, मज़बूती से पकड़कर पीटो और उसे अपने जीवन से भगा दो।
शिक्षा स्वर्ग का द्वार खोलती है, खुद को जानने का अवसर देती है।
स्त्रियां सिर्फ रसोई और खेत पर काम करने के लिए नहीं बनी है, वह पुरुषों से बेहतर कार्य कर सकती है।
पत्थर को सिंदूर लगाकर और तेल में डुबोकर जिसे देवता समझा जाता है, वह असल मे पत्थर ही होता है।
कोई तुम्हें कमजोर समझे, इससे पहले तुम्हे शिक्षा के महत्व को समझना होगा।
Savitribai Phule Motivational quotes:
स्वाभिमान से जीने के लिए पढ़ाई करो, शिक्षा ही इंसानों का सच्चा आभूषण है।
देश में महिला साक्षरता की भारी कमी है क्योंकि यहां की महिलाओं को कभी बंधन मुक्त होने ही नहीं दिया गया।
अगर पत्थर पूजने से बच्चे पैदा होते तो नर नारी शादी ही क्यों करते।
अपनी बेटी के विवाह से पहले उसे शिक्षित बनाओ, ताकि वह आसानी से अच्छे-बुरे का फर्क कर सके।
आखिर कब तक तुम अपने ऊपर हो रहे अत्याचार को सहन करोगी। देश बदल रहा है, इस बदलाव में हमें भी बदलना होगा। शिक्षा का द्वार जो पितृसत्तात्मक विचार ने बंद किया है, उसे खोलना होगा।
Savitribai Phule Inspirational quotes:
जाओ जाकर पढ़ो-लिखो, मेहनती बनो, आत्मनिर्भर होकर काम करो, ज्ञान और धन एकत्रित करो। ज्ञान के बिना सब खो जाता है। ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते है, इसलिए खाली मत बैठो, जाओ जाकर शिक्षा ग्रहण करो।
तुम गाय, बकरी को सहलाते हो, नाग पंचमी पर नाग को दूध पिलाते हो, लेकिन दलितों को तुम इंसान नहीं, अछूत मानते हो।
एक सशक्त और शिक्षित स्त्री सभ्य समाज का निर्माण कर सकती है। इसलिए तुम्हारा भी शिक्षा का अधिकार होना चहिए। कब तक तुम गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी रहोगी। उठो और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करो।
चौका बर्तन से ज्यादा जरूरी है पढ़ाई, क्या तुम्हें मेरी बात समझ में आई?
इस धरती पर ब्राह्मणों ने स्वयं को स्वघोषित देवता बना लिया है।
किसी समाज या देश की प्रगति तब तक असंभव हैं, जब तक वहां की महिलाएं शिक्षित ना हों।
मेरी कविता को पढ़ सुनकर यदि थोड़ा भी ज्ञान प्राप्त हो जाए, तो मैं समझूंगी मेरी मेहनत सार्थक हो गई। मुझे बताओ सत्य निडर होकर कि कैसी है मेरी कविताएं… ज्ञान परख यथार्थ मनभावन या अदभुत… तुम ही बताओ।
